_mann_j

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Reposts
  • _mann_j 3w

    सवाल और भरोसा...!

    कुछ सवाल ऐसे होते है जो पूछे नहीं जाते, ना ही उनका जवाब ढूंढा जाता है, बस थोड़ा सा भरोसा रखना पड़ता है भरोसा इसलिए ताकी पता चले हम कितने सच्चे है अपनी जगह, जवाब खुद-ब-खुद हमें कही-ना-कही अपने-आप ही मिल जाते है.

    रही बात भरोसे की तो "भरोसा" एक ऐसा शब्द है जब-तक आपको किसी पर हो एक सुकून एक गुरूर रहता है, मग़र जब टूट जाता है तब सिर्फ़ हँसी आती है!

    © मनोजसिंह परमार (mann_j)

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    सवाल और भरोसा...!

  • _mann_j 3w

    ओ जाते नहीं कहीं रिश्ते पुराने
    किसी नए के आ जाने से
    जाता हूँ मैं तो मुझे तू जाने दे
    क्यूँ परेशां है मेरे जाने से.....��

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    .

  • _mann_j 3w

    बीता हुआँ वक़्त और बदले हुएं लोग बोहत याद आते है...! ��

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    Ek Shaam Main Yoon Baitha Rha,
    Vakt Betata Rha Log Yaad Aate Rhe!
    ©_mann_j

  • _mann_j 4w

    Aise hi randomly likha h....Koi match nhi h bt fir v....��
    धुँआ- remembrance
    दिखाई- disappeared

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    अभी तो मिले थे और अभी ही बिछड़ना,
    कुछ वक़्त ही तो बिता हँसते, अभी रोना!

    इतना वक़्त लगा वक़्त को हमें मिलाने में,
    बिछड़ने में वो वक़्त भी नही दिखाई दिया!

    कुछ सफों की ख़ामोशी हमें क़ैद कर लेगी,
    पलों की घुटन और धुआँ फिर वही रोयेगी!

    परख नही है लोगो की हम ग़लती कर देते,
    हर-बार वही धोखा हर-बार यही दोहरा देते!
    ©_mann_j

  • _mann_j 4w

    Aise hi lga thoda likh de...��
    Pc :- me ��

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    तपके सूरज थक गया होगा,
    वो शाम होते घर गया होगा!

    ढूंढ रहा था सुकून शाम होते,
    बाद वो शक़्स मर गया होगा!

    पहेली लगी ज़िन्दगी जीते-जी,
    मरकर भी वो उलझा रहा होगा!

    जिसने उम्रभर वादा निभाया है,
    वो शख़्स आबाद रह गया होगा!
    © मनोजसिंह परमार

  • _mann_j 4w

    चश्म-ए-दिल :- Eyes of heart

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    .

  • _mann_j 4w

    Kro collab....����

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    अजीब दुःख से गुज़रना पड़ रहा हैं,
    तुमसे बात करके भी रोना पड़ रहा हैं!
    © मनोजसिंह परमार

  • _mann_j 5w

    वक़्त ठीक से मिला नही लिखने का....जो है yhi है...��

    इस तरह खुद को माफ करता है वो शख़्स
    मेरा दिल साफ़ है ऐसा कहता है वो शख़्स!

    ठुकरा-कर मुझे बोला याद क्यों नही करते,
    ये कैसी-कैसी फ़रियाद करता है वो शख़्स!

    अपनी मर्ज़ी से जुदा हुआँ और बिछड़ा वो,
    इल्म फ़रेब मग़र सच्चे बताता है वो शख़्स!

    तबस्सुम आईने सा और आँखे शब-चराग़,
    तौर फ़रेबी बात लहज़े की करता वो शख़्स!
    © मनोजसिंह परमार

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    वो शख़्स...!
    अनुशीर्षक पढ़े...!

    © मनोजसिंह परमार

  • _mann_j 5w

    बाकी का कल सुबह अपलोड करूँगा.....����

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    वो शक्श...!

    इस तरह खुद को माफ करता है वो शक्श,
    मेरा दिल साफ़ है ऐसा कहता है वो शक्श!
    © मनोजसिंह परमार

  • _mann_j 5w

    ताकि बचा जो है उसे रवाना किया जाएँ.....��
    Collab kar sakte ho.... jawabi tor par....��

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    जब मिलों मुझे एक काम ये भी कर जाना,
    बचा क्या है हमारे दरमियाँ बता कर जाना!
    © मनोजसिंह परमार