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Reposts
  • amarendrasingh 16w

    एक और पुकार...

    मुझको दफना दो चाहे, या बहा दो अब किसी नदी में,
    मेरे बदन पर लगी ये आग, अब बुझती नहीं है बुझाने से…

    वो लोग जो जाग जाते थे, किसी की इक आहट से,
    वो लोग अब जागते नहीं है, मेरे इतना चिल्लाने से…

    लेकर दिया अपने हाथों में, अब तो हर कोई घूम रहा है,
    ना जाने तब क्यों नहीं नज़र आये, मेरे इतना बुलाने से…

    ये इक दो दिन का शोर है, कल फिर वही दोर आयेगा,
    ये इक दो दिन का शोर है, कल फिर वही दोर आयेगा,
    अब तो मर चुकी हूँ मैं, अब क्या फ़ायदा आँसू बहाने से…

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 17w

    मुझसे ये ना पूछो की मेरा हाल क्या है,
    अब तो नींद नहीं आती है मुझको रातों में...

    तेरी याद में खुद को भुलाये बैठा हूँ,
    अब तो तेरा ही ज़िक्र आता है मेरी बातों में...

    गिन गिन के तारे मै तो रातों को जागा करता हूँ
    अब तो दिन गुजर जाता है मेरा तेरी यादों में...

    तू कोई ख्वाब है हकीकत है या दुआ है कोई रब की,
    तू कोई ख्वाब है हकीकत है या दुआ है कोई रब की,

    ना जाने क्यों तेरा ही चेहरा नज़र आता है मेरे खुआबों में...

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 24w

    इस अंधेरी रात में ये रौशनी कहाँ से आई है.
    अच्छा तुम हो....
    अब ये जाना की ये चांदनी कहाँ से आई है.

    क्यों मुस्कुरा रहे है फूल इस पतझड़ के मौसम में भी,
    अब ये जाना के बिन बादल के बरसात कैसे आई है.

    तेरे शहर में परिंदों ने भी बना लिया है बसेरा अपना,
    तेरे शहर में परिंदों ने भी बना लिया है बसेरा अपना,
    तुझको देखा तो ये जाना की ये बाहार कैसे आई है.

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 26w

    अब दर्द का कोई एहसास नहीं होता,
    ये ज़ख्म जो काफी पुराने हो गये है ना...
    घर का आईना भी टूटा सा लगता है मुझको,
    खुद को देखे काफी ज़माने हो गये है ना...
    तुम तो कहती थी, की खुदा ने बनाया है तुम्हे मेरे लिए,
    अब तो सच कह दो, अब तो हम बेगाने हो गये है ना...
    कोई ज़हर दे दो, या कर दो इलाज इस ज़ख्मे दिल का,
    कोई ज़हर दे दो, या कर दो इलाज इस ज़ख्मे दिल का,
    हम आज भी तुझको चाहते है, दीवाने हो गये है ना.
    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 26w

    हर रोज खोलता हूँ मैं किताबें कुछ पढ़ने के बहाने,
    हर रोज तेरा चेहरा मुझको किताबों में नज़र आ जाता है..
    तूने जो दिया था फूल मुझको पहली मुलाक़ात पर,
    आज भी उसमे से मुझको तेरा अक्श नज़र आ जाता है..
    ये हवाये छूकर आई है शायद तुझको,
    ये मौसम आज भी मेरे दिल मे इक आग लगा जाता है..
    कभी चूमता हूँ तो कभी सीने से लगाता हूँ खत तेरे,
    कभी देखता हूँ फ़लक पे तो तेरा साया नज़र आ जाता है
    और कुछ इस कदर बस गई है तू मेरी सांस में,
    और कुछ इस कदर बस गई है तू मेरी सांस में,
    कोई पूछता है जब नाम मेरा, तो नाम तेरा जुबां पर आ जाता है.
    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 29w

    चंद्रयान-2

    तूने जाकर अंधेरे मे सब को है रौशनी दिखाई,
    अब तो मंजिल हमे खुद के पास नज़र आ रही है.
    गिरा के खुद को तूने सबको है चलना सिखाया,
    राहें अब चाँद की हमको साफ़ नज़र आ रही है.
    नहीं डगमगाया हमारा जूनू कुछ कर गुजरने का,
    तेरी क़ुरबानी अब तो दिल मे ओर जोश जगा रही है.
    तू फ़िक्र न कर हम तेरे पास जरूर आयेंगे,
    हमको चाँद पर तेरी परछाई नज़र आ रही है.
    जब तक मिलेंगे ना तुझसे हम चैन से सो ना सकेंगे,
    तुझसे मिलने की चाह अब हमको और जगा रही है.

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 31w

    तेरी याद अब इस दिल से जाती क्यों नहीं,
    सांस तो रूकती है मगर ये मौत आती क्यों नहीं,
    हमने तो उतार दी थी तेरी तस्वीरें इन दीवारों से,
    मगर तेरी परछाई इन दीवारों से जाती क्यों नहीं,
    क्यों छोड़ कर चली गई थी तुम मुझको तन्हा करके,
    वजहै बेवफ़ाई की तुम मुझको अब बताती क्यों नहीं,
    अब तो ना कोई दवा ना दुआ असर करती है मुझ पर,
    तुम अपने हाथ से मुझपर खंजर चलाती क्यों नहीं,
    तेरी याद अब मेरे दिल से जाती क्यों नहीं,
    सांस तो रूकती है मगर ये मौत आती क्यों नहीं.

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 31w

    हस के पूछा उन्होने राज़ मेरी उदासी का,
    वो भी चाहते है की नाम उनका मेरी ज़ुबा पर तो आये...

    यू मुस्कुराकर चले गये वो सामने से मेरे,
    कोई पत्थर से जैसे किसी सीसे को तोड़ जाये...

    जख़्म-ए-दिल कर के भूल गये है वो शायद,
    कोई जाकर के मेरा हॉल-ए-दिल तो उनको बताये...

    इश्क़ उनको भी है मगर वो कभी ज़ाहिर नहीं करते,
    इश्क़ उनको भी है मगर वो कभी ज़ाहिर नहीं करते,
    बेचैन रहते है वो भी अगर हम इकपल उनको नज़र न आये...

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 33w

    कोई करे तारीफ़ जब तेरी, तो नजाने क्यों इस दिल को बुरा लगता है,
    मेरे सिवा तुझको कोई देखे, अब इस दिल से बर्दाश नहीं होता....
    मौत आ जाये, तो शायद थोड़ा सुकून मिल जाये मुझे,
    तेरे जाने के बाद, अब मुझसे तेरा और इन्तजार नहीं होता....
    तू जो हस कर ना गुजरती अगर सामने से मेरे,
    ये पत्थर का दिल मेरा, तेरे इश्क़ मे इतना बेकरार नहीं होता....
    और हम भी जी लेते ये ज़िंदगी किसी बंजारे की तरहै,
    और हम भी जी लेते ये ज़िंदगी किसी बंजारे की तरहै,
    अ खुदा, अगर मुझे कभी उससे इतना प्यार नहीं हुआ होता....

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 35w

    जख़्म आज भी हरे है, तू आकर देख तो ज़रा,
    तेरे जाने के बाद इनसे रिस रिस के लहू निकलता है.

    दवा मर्ज़ की हो कोई तो जाकर कही से ढूंढ लूँ,
    ज़हर-ए-बेवफाई कहा इतनी आसानी से निकलता है.

    हमने पुछा इलाज़ जो इस दर्द-ए-मोह्बत का,
    हमने पुछा इलाज़ जो इस दर्द-ए-मोह्बत का,
    वो बोले महखाने मे हर मर्ज़ का इलाज मिलता है.

    ©amarendrasingh