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Reposts
  • amarendrasingh 4w

    मुझको भुलाकर के कैसे ख़ुश रह लेते हो तुम|
    अब ये भी बता दो कि इन आंसुओं को कैसे पी लेते हो तुम|
    तेरे बगैर तो मुझको नींद तक नहीं आती|
    मेरे बगैर फिर कैसे जी लेते हो तुम|

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 4w

    तेरी याद ने कितना तड़पाया है मुझको|
    कैसे बताऊँ कि बारिशों ने भी जलाया है मुझको|
    तुझसे बिछड़कर सज़ा कुछ इस क़दर मिली मुझे|
    तेरे जाने के बाद तेरी तस्वीर ने भी रुलाया है मुझको|
    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 4w

    ऐसे पत्थर भी ना बन कि तुझको तोड़ना पड़ जाए|
    किसी के जख्मों को भी ना छेड़ कि आँसू अँगारे बन जाएं|
    तुझको गुरुर है कि तू पलभर में मिटा सकता है सबको|
    ज़रा संभलकर खेल आग से कहीं तू राख़ ना बन जाए|

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 9w

    यूँ चुराकर के मुझसे नज़रे, कब तक मुझको तड़पाओगी|
    है इश्क़ तुमको भी अगर मुझसे, ये राज़ कब तक दिल मे दफनाओगी|
    तुमको मालूम नहीं कि किस क़दर कटती हैं रातें तेरे इंतजार में|
    तुमको मालूम नहीं कि किस क़दर कटती हैं रातें तेरे इंतजार में|
    बस ये जान ले ये तेरी बेरुखी इक दिन मेरी जान लेकर जायेगी|
    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 10w

    तेरी दिखती नहीं तस्वीर जिसमे, मैंने वो आईना ही तोड़ दिया|
    जिस गली से होता नहीं दीदार तेरा, मैंने उस गली से जाना ही छोड़ दिया|
    तुम तो कहती थी कि मेरी खातिर बस छोड़ दो पीना शराब|
    आ देख ले तेरे जाने के बाद तो मैंने जीना ही छोड़ दिया|

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 11w

    जख़्म जब भरने ही नहीं, तो मरहम लगाने का क्या फायदा,

    वफ़ा जब करनी ही नहीं, तो इश्क़ जताने का क्या फायदा |

    तू ख़ुश रहे, हम तो जी लेंगे खुदको बर्बाद करके भी,

    तू ख़ुश रहे, हम तो जी लेंगे खुदको बर्बाद करके भी,

    जब तू हो ही नहीं सकता मेरा, तो तुझको अपना बनाने का क्या फायदा |

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 64w

    एक और पुकार...

    मुझको दफना दो चाहे, या बहा दो अब किसी नदी में,
    मेरे बदन पर लगी ये आग, अब बुझती नहीं है बुझाने से…

    वो लोग जो जाग जाते थे, किसी की इक आहट से,
    वो लोग अब जागते नहीं है, मेरे इतना चिल्लाने से…

    लेकर दिया अपने हाथों में, अब तो हर कोई घूम रहा है,
    ना जाने तब क्यों नहीं नज़र आये, मेरे इतना बुलाने से…

    ये इक दो दिन का शोर है, कल फिर वही दोर आयेगा,
    ये इक दो दिन का शोर है, कल फिर वही दोर आयेगा,
    अब तो मर चुकी हूँ मैं, अब क्या फ़ायदा आँसू बहाने से…

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 66w

    मुझसे ये ना पूछो की मेरा हाल क्या है,
    अब तो नींद नहीं आती है मुझको रातों में...

    तेरी याद में खुद को भुलाये बैठा हूँ,
    अब तो तेरा ही ज़िक्र आता है मेरी बातों में...

    गिन गिन के तारे मै तो रातों को जागा करता हूँ
    अब तो दिन गुजर जाता है मेरा तेरी यादों में...

    तू कोई ख्वाब है हकीकत है या दुआ है कोई रब की,
    तू कोई ख्वाब है हकीकत है या दुआ है कोई रब की,

    ना जाने क्यों तेरा ही चेहरा नज़र आता है मेरे खुआबों में...

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 72w

    इस अंधेरी रात में ये रौशनी कहाँ से आई है.
    अच्छा तुम हो....
    अब ये जाना की ये चांदनी कहाँ से आई है.

    क्यों मुस्कुरा रहे है फूल इस पतझड़ के मौसम में भी,
    अब ये जाना के बिन बादल के बरसात कैसे आई है.

    तेरे शहर में परिंदों ने भी बना लिया है बसेरा अपना,
    तेरे शहर में परिंदों ने भी बना लिया है बसेरा अपना,
    तुझको देखा तो ये जाना की ये बाहार कैसे आई है.

    ©amarendrasingh

  • amarendrasingh 74w

    दर्द का अब कोई एहसास नहीं होता,
    ये ज़ख्म जो काफी पुराने हो गये है ना...
    घर का आईना भी टूटा सा लगता है मुझको,
    खुद को देखे काफी ज़माने हो गये है ना...
    तुम तो कहती थी, की खुदा ने बनाया है तुम्हे मेरे लिए,
    अब तो सच कह दो, अब तो हम बेगाने हो गये है ना...
    कोई ज़हर दे दो, या कर दो इलाज इस ज़ख्मे दिल का,
    कोई ज़हर दे दो, या कर दो इलाज इस ज़ख्मे दिल का,
    हम आज भी तुझको चाहते है, दीवाने हो गये है ना.
    ©amarendrasingh