#amliphilosphy

50 posts
  • amlisingh 13w

    जीवन में पर्याप्त मात्रा में चरस बो दिया गया है
    अब इसको मुझे ही फूकना होगा
    #amliphilosphy
    ©amlisingh

  • amlisingh 19w

    किताबों से इश्क कर लो
    जीवन भर जिंदा रहोंगें प्यारे
    #amliphilosphy
    ©amlisingh

  • amlisingh 19w

    मै बुरा हूँ

    अक्सर सोचता हूँ मैं बहुत ज्यादा गलत हूँ यही सत्य है बहुत बुरा हूँ दूसरे की खुशी में खुश हूँ
    अपनों की नराजगी से दुख होता है
    जो समझता नहीं उसको समझाता क्यों हूँ
    टूटी पड़ी राहों को जोड़ता क्यो हूँ
    मुझे कभी समझ में नहीं आता है
    हाँ यह बात सत्य है मै बहुत बुरा हूँ
    किसी का दर्द देखा नहीं जाता
    लाख कोशिश करू पर
    खुद को रोका नहीं जाता
    हर तरह से प्रयास करता हूँ
    हां यही सत्य है मै बहुत बुरा हूँ
    शराब भी पी लेता हूँ
    थोड़े से आराम के लिए
    वो भी हराम हो जाता है
    यादों के बैनर ताले
    क्या करू बर्दाश्त नहीं होता
    चिला देता हूं ज्यादा हो तो बाते दाबा देता हूं
    क्या करू बदनाम हूँ
    खुद को समझा लेता हूँ
    श्मशान को देख सारी इच्छा मिटा देता हूं
    अपनी बुराइयों सुनने से ही सुकून मिलता है
    क्या करू बुरा हूँ खुद को समझा लेता हूँ
    समझा लेता हूँ
    -- अघोरी अमली सिंह - - -
    #amliphilosphy,#spokenword
    ©amlisingh

  • amlisingh 21w

    पानी

    देखों भैया सुनो हमाई
    कब तक देबी मौसम की दुहाई
    जो काल बोहताई भारी पड़ रहो
    जीगर कलेजा अपनों बर रहो
    सूखो पड़ो जो अपनों जग मानस
    कहूँ और जावे को मन नाहि
    बड़े बड़े बोल बोल गए नेता
    सबरे पापड़ तोल गए जेता
    कछु समझ अब और ना आ रहो
    कोनू राह नजर ना आ रई
    आत्मा सूखत ही जा रई
    दूर दूर ना बदली छाई
    कैसे हो है ई बार बिवाई
    जो बात बी दिमाग खा रई
    पानी के लाने भी हो रही लड़ाई
    कौनू धरे है कट्टा बैठो
    कौनू लए तलवार
    जो नीर के चक्कर में
    अब होने का आर पार,
    रूको भैया सुनो हमाई
    बिन पानी है सब बेकार
    समय रहे समझलो
    जल्दी नहीं अपने
    चल पड़े बा पार
    सब कछु हो जाने बेकार
    सूखो पड़ो जो पीपल अपनों
    झड पड़ो है जंगल सारो
    तानिक तो करो विचार
    अघोरी अमली करे जन जन से यही पुकार तानिक करो विचार
    -अघोरी अमली सिंह
    #amliphilosophy
    #bundeli
    ©amlisingh

  • amlisingh 23w

    द्वन्द

    शीर्षक - द्वन्द्व
    हे मनुष्य तुम जिन विषयों पर अपनों से लड़ने को आतुर हो, यह धन सम्पत्ति सब राख हैं, दिल तो भरा है मैल से और प्रभु के नाम की माला का जाप करते हो, कर्म को भूल धन, सत्ता अंहकार के लोभ में फंसे पड़े हो, क्या होगा तेरा बंदे यह सिर्फ तेरे कर्म निर्धारित करते हैं, बाकि सब भ्रम है, दूसरों को नाश करने की होड़ में खुद का विनाश करने में लगे हो, प्रकृति से छेड़छाड़ कर सर्वनाश की ओर बढ़ रहे हो अच्छा है बढ़ते रहो बढ़ते रहो फिर माफीनामा लेकर दर दर भटकते हुए प्रभु के पास जाओगे, वहाँ भी कुछ नहीं होने वाला, कर्म ही महत्वपूर्ण है
    यह बात सदियों से होती आ रही है
    चलो समय होने गया अब अगले घाट की ओर रुख करते हैं पर ध्यान रहे सब कुछ जो दिख रहा है चैनो आराम सोहरत यह ज्यादा समय कहीं नहीं टिकती कर्म कर कर्म
    चल राही आगे बढ़ चलते हैं अगले घाट पर
    पर पिता परमात्मा परमेशवर की जय हो जय हो हर हर महादेव
    #amliphilosphy,
    ©amlisingh

  • amlisingh 30w

    Forever sad

    सहमत हूँ असहमति से
    असहमत हूँ सहमति से
    पल दो पल में बदलती कहानी
    दिल धड़कन की जुबानी से
    कसमकश में रहे सांसे
    उलझनों में कटती है रातें हैं
    बेफिक्र हूँ इस दुनिया की टून टून से
    नफरत है सुन साहिबा सुन की धुन से
    मीठी गोली खाने वाले लाखों इस भीड़ में
    बोल थोड़े कड़वे सही पर सूकून दे जाते हैं
    जख्मी रूह में लिपटे लिवास को
    सिवास भी कब तक करेगी इलाज इस जालिम दिल का
    तुम भी मिलों कभी मयखाने में जहाँ जिक्र हो कल का
    कल का #amliphilosphy, #hindiwriters
    ©amlisingh

  • amlisingh 31w

    Womaniya दिवस

    नारी के बिना आप वो क्यारी हो
    जिसमें कभी भी फूल नहीं खिल सकते
    #amliphilosophy

  • amlisingh 35w

    चाय की चुस्की

    भीड़भाड़ में फंसे इस मस्तिष्क का इलाज एक चुस्की की चाय की, शीत लहर को काबू करती एक चुस्की चाय की, नुक्कड़ पर हमदर्द हमारी एक चुस्की चाय की,
    मेल मिलन की व्यवहारी है एक चुस्की चाय की
    यारों की यारी है सुट्टे के संग एक चुस्की चाय की
    राजनीती के गलियारों में चर्चित एक चुस्की चाय की
    खुद ब खुद दबंग है एक चुस्की चाय की
    आओ पीने चलते हैं एक चुस्की चाय की
    #tea, #amliphilosphy
    ©amlisingh

  • amlisingh 35w

    हमारी अयोध्या

    राजनीती के चश्मे को उतार कर तो देखो बाबू
    सरयू सुनाती अवध की स्वभिमानी कहानी
    जहाँ दिल दिल में बस्ते श्री राम है ,
    घर घर श्री राम के धुनि रमाये दीवाने
    जिनकी मेहनत को करे दुनिया प्रणाम
    अंधियारे को गुम करती
    श्री राम जय राम जय जय राम की धुन
    अरे कहा पड़े हो मीडिया और राजनीति के चक्कर में।
    कोई नहीं है श्री राम भक्तों के टक्कर में
    जहाँ प्रेम है मर्यादा है तप है आदर्श हैं
    सरयू जिसका रोज सुबह सुबह
    चरण स्पर्श कर स्वाभिमान उदघोष करती हो,
    संतो की वाणी से वातावरण पवित्र हो जाता हो,
    वह नगरी कोई विवादस्पद नहीं,
    हमारे स्वाभिमानी शौर्य गौरव का प्रतीक है
    भेदभाव समाप्त जहां समन्वय पहचान
    रामलला जन्में जहाँ श्री राम जन्मभूमि को
    मेरा जीवन भर दंडवत प्रणाम है
    हमारे श्री राम दिल में सदैव विराजमान है
    दिल कहता है सब्र करो
    अयोध्या में भव्य मंदिर में विराजमान होने वाले
    हमारे सीताराम है

    श्री राम जय राम जय जय राम
    श्री राम जय राम जय जय राम


    **अघोरी अमली सिंह **



    ©amlisingh

  • amlisingh 40w

    अनजाने दोस्त

    इस संसार के सवालों के परे
    दोस्ती से भरपूर जीवन अद्भुत है,
    जहाँ हर गम खत्म का सर्वनाश है,
    विचारों का आदान प्रदान है
    युद्ध है वैचारिक मतभेद भी है,
    अंधेरे से लड़ने का जहां आत्मविश्वास है
    एक नई सुबह के इंतजार मे
    सपनों से भारी रात भी है,
    कलम भी है कलमकार भी
    जख्मों में लिप्त स्याही भी
    जो लुढ़क जाती है कागज पर
    बातों बातों में रूह को सुकून देने को,
    दोस्ती में ना कोई उम्र ना कोई सीमा ना भेदभाव,
    ना कोई धर्म है, जो हैं मेहनत और कर्म है
    बाकी दुनिया को जलाती चिलम भी है
    मेरे लीवर को जलाती टेबल पर रखी शराब भी
    , पर परम सुख दोस्ती में है
    सिर्फ और सिर्फ दोस्ती में
    #amliphilosphy
    ©amlisingh

  • amlisingh 40w

    लिखना ही भूल जाता हूँ,
    जब तुम्हारी याद आती है
    जान कसम
    यह प्यार मोहब्बत वाली बरसात
    खतरनाक सैलाब लाती है
    #amliphilosphy
    ©amlisingh

  • amlisingh 45w

    अपना स्वाभिमान

    ना बाबर पंसद है ना खिलजी
    हमको अपने राष्ट्र का स्वाभिमान पसंद है
    अयोध्या में विराजमान श्री राम पसंद है
    , जिनके नाम मात्र से अकबर कापता था
    वो महाराणा प्रताप पसंद है
    शिव जी का यशगान पसंद है,
    जौहर का सम्मान पसंद है ,
    सीमाओं पर खड़ा देश का वीर जवान पसंद है
    , किन्तु संस्कृति विरासत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं,
    ऐसे लोगों के लिए सिर्फ श्मशान पसंद है
    हम कलम भी उठाते हैं और तलवार भी,
    जरूत पड़े तो राष्ट्रविरोधीयो को सीधे
    यमलोक भी पहुंचाते हैं
    सभी राष्ट्र भक्तों को मेरा कोटी कोटी नमन
    ** अघोरी अमली सिंह **
    जय भवानी
    जय श्री राम
    जय हिंद
    #amliphilosphy
    ©amlisingh

  • amlisingh 45w

    जमाना जाली

    खून के रिश्तों में पानी मिला रहे हो
    बरखुरदार
    कहा बेचना चाहते हो
    यह भी बता देना
    ©amlisingh

  • amlisingh 46w

    खंडर पड़ा एक जमाना
    फिर भी इस दिमाग को बवंडर मचाना है
    माना हर दिन एक नई जंग है,
    फिर भी मौज में जीवन जीते जाना है
    जो होना है वो हो जाना है
    वक्त किसी के काबू ना आना है
    खंडर पड़ा एक जमाना
    फिर भी दिमाग को बवंडर मचाना है
    ©amlisingh
    #amliphilosphy

  • amlisingh 46w

    आशिक

    गम और रम का रिश्ता पुराना लगता है
    नुक्कड़ पर खड़ा वो लड़का दीवाना लगता है
    मदहोश है किसी के नशे में वो
    घर से बेगाना लगता है
    गम और रम का रिश्ता पुराना लगता है
    नुक्कड़ पर खड़ा वो लड़का दीवाना लगता है
    अघोरी अमली सिंह
    #amliphilosphy
    ©amlisingh

  • amlisingh 52w

    दीपावली

    घर की साफ सफाई के साथ साथ
    अपने मन मस्तिष्क में फैले
    कचरे की भी सफाई करें
    दीपावली शुभ हो जायेगी
    #amliphilosphy
    ©amlisingh

  • amlisingh 52w

    संघर्ष का दूसरा नाम मध्यमवर्गीय परिवार
    ©amlisingh

  • amlisingh 53w

    अघोरी

    वो श्मशान पर धुनी रमा रहा है
    बेफिक्र है अपनी दुनिया जमा रहा है
    शरीर और आत्म के बंधन को मिटा रहा है
    कपाल से कृपाल तक समन्वय बना रहा है
    धुत है नशे में पर जो चाह रहा है वो पा रहा है
    इस बेलगाम दुनिया से दूर प्रभु से राह मिला रहा है
    वो अघोरी है भस्म लगा रहा है
    तंत्र मंत्र से जन जन के कष्ट मिटा रहा है
    मांगता कुछ नहीं पर स्वंय को लूटा रहा है
    अघोर है महाकाल की भक्ति में जीवन जीता जा रहा है - अमली सिंह #amliphilosphy
    ©amlisingh

  • amlisingh 58w

    स्वतंत्र राष्ट्र में परतंत्र पड़े दिमाग है
    कलम बेलगाम पर कलमकार गुलाम है
    यह बात सदियों से होती आ रही है बिल्कुल आम है
    इन रक्त रूपी कोशिकाओं में लगे जाम है
    मुंह खोल बड़बड़ाना इनका काम है
    देख हर गली के नुक्कड़ पे खड़ा
    एक विद्वान हैं खड़ा विद्वान हैं
    - अघोरी अमली सिंह
    #amliphilosphy
    ©amlisingh

  • amlisingh 62w

    यह दर्द खत्म ना हुआ कम्बख्त स्याही खत्म हो गई
    ©amlisingh