#ashk

61 posts
  • shamaaz 2w

    Ashk

    Aankhon se palkon ki taqraar kya huyi...
    Jaise ashkon ki barsaat si ho gayi...

    ©SZ_Quotes��

  • thesymphoniouspoet 6w

    Jao tumhari naraazgi par hum afsoos zaya nahi kartey;
    jo baat sach hai, usey hum ghumaya nahi kartey;
    Jab ghalti nahi shahid, to kyun ho dartey; unkey roney par tum kyon aah bhartey;
    Kya khoob keh gaye wo, ke "jao apney us mehboob ke ghar";
    "meri ghair maujoodgi mai jissey tum hamesha baat kartey";
    Ab Chahey bheeg jaye unka daman, nigahein darya-e-ashk se;
    samjhaye jo na samjhey, uski fikar ab hum nahi kartey.

    ©thesymphoniouspoet

  • anshithewriter 8w

    Dard

    Kuch dard aise bhi hai jinhe dikha nahi sakte
    Kuch raaz aise bhi hai jinhe hum bata nahi sakte
    Tham liya karte hai ashko ko girne se pehle
    Yun gairo ke liye inhe hum baha nahi sakte.
    ☺️��❤️

    ©anshithewriter

  • anjaanwrites06 11w

    Daastaan

    Aap Humare Zindagi Ki Woh Daastaan Hai,
    Jise Likhne Mein, Humaare Ashk Siyahi Bane Aur Humaara Jism Kalam.........

    ©Anjaan

  • anjaanwrites06 11w

    Siyahi

    Ab Dil Ko Dard Hone Par,
    Ashk Siyahi Bankar Kaagaz Par Utarte Hai.....


    ©Anjaan

  • thesymphoniouspoet 13w

    BARSAAT

    Barasney de humpe Aaj phir unki rehmatey;
    Ke phir aysa mausam milega nahi;
    Bheegoney de mujhey ye jism, Ke tar hojaye har kona;
    Phir is barsaat mai bheegney ka mauka milega nahi.
    Darr hai Ke kaheen fanaa na hojaoon unke dedaar se pehley;
    Ke phir unkey saath bheegney ka mauka milega nahi;
    Yeh Jism khaak hai, baad rooh-e-Judai ke;
    Ek hojaye do jism aaj, Ke phir yeh bahana milega nahi;
    Ashk lazim hai aankhon se, Yaad mai unki;
    Beh jaye aaj in nigahoon se ashk sarey, ishq mai ashqoon Ke peeney ka mauka phir milega nahi.
    ©scarletking

  • seasonsoflife_neh 22w

    Ashk

    ©seasionsoflife_neh

    Na pooch mujhse k kahani kya hai,Main bewajha kisi Ko rulata nahi,Chalkte aansuon Ko deta hu Sahara,Khud apni aakhon se Ashk bahata nahi!

  • ayushi_jain 42w

    Duniya Mein Itni Rasmein Kyon Hain;
    Pyaar Agar Zindagi Hai To Ismein Kasmein Kyon Hain;
    Humein Batata Kyon Nahi Koi Ye Raaz;
    Dil Agar Apna Hai To Ye Kisi Aur Ke Bas Mein Kyon Hai!
    Ayushi...

  • avinashpallko 46w

    हीर

    इक कोरे कागज पर वो
    एक तस्वीर बनाने बैठा
    सपनों में जो आती थी
    वो हीर बनाने बैठा

    उलझ रहा था उसका मन
    कैसे वो शुरुआत करे
    परियों की रानी दर्शाए
    और फूलों की बरसात करे

    इन जलते बुझते खयालों में
    वो खो गया बीती यादों में
    याद आ गई हीर उसे जो
    बिछड़ी थी पिछ्ले भादों में

    था प्रेम बड़ा ही गहरा उसको
    बस एक झलक पे झूमा करता
    लिख लिख के ख़त अरमानों से
    गली में उसकी घूमा करता

    छत पे जब भी दिख जाती
    चाँद सा वो खिल जाता था
    ख़त से लिपटा पत्थर फेंकता
    दौड़ के फिर छुप जाता था

    वो चुपके से फिर ख़त पढ़ती
    और हंस के ओझल हो जाती थी
    शर्माना चाहे कम ना हो
    पर छुप के मिलने आ जाती थी

    बातों में उसकी वो खो जाता
    मुस्कान भी हद से प्यारी थी
    ना वो समझा ना वो समझी
    ये रूहों की रिश्तेदारी थी

    फिर एक सुबह जब वो जागा
    हर ओर ही चीख पुकार थी
    दौड़ के पहुँचा उसके मोहल्ले
    पर वो गालियाँ अब सुनसान थीं

    जान गया पहचान गया वो
    ये नफरत मज़हब वाली थी
    प्यार था उसका ख़ुदा के जैसा
    पर सबके लिए तो गाली थी

    "वो हीर मेरी, बस मेरी थी
    अब कहाँ गई सब छूट गया"
    आँसू पालकों से झर झर जाएँ
    जन्नत का प्याला टूट गया

    सालों जैसे अब दिन गुज़रें
    वो चाह के भी ना भुला सका
    हर वक़्त दिखे बस चेहरा उसका
    बमुश्किल आंखो को सुला सका

    फिर एक सुबह जब वो जागा
    मुस्कानों से चमक रहा था
    यूँ तो आँसू थे पलकों में
    पर खुशियों से महक रहा था

    राज़ किसी को पता नहीं पर
    आई थी वो ख्वाबों में
    बोली "तुम क्यूँ गुमसुम हो
    देखो ना मेरी आँखों में"

    "हूँ दूर तो क्या ज़ुल्म हुआ
    यूँ खुद को क्यूँ जला रहे तुम
    उस चाँद तले ही तो हैं दोनों
    इस बात को क्यूँ भुला रहे तुम"

    "लिखा है मिलना ग़र किस्मत में
    मिलवाना भी तो इसको है
    क्यूँ डरना और क्यूँ रोना
    दुनिया की चिंता किसको है"

    "पर एक वादा कर के जाऊँगी
    'ना' तुम कह नहीं पाओगे
    हर रोज़ ख्वाब में आ जाऊँगी
    जो तुम ख़ुश होके मुस्काओगे"

    आज तलक उम्मीद बंधी है
    एक दिन तुम मिल जाओगी
    दिन इंतज़ार के पूरे होंगे
    सपनों से 'सच' हो जाओगी

    वो हंसता है अब गाता भी है
    दुनिया में रहना सीख गया
    ना तस्वीर बनी ना कुछ और मगर
    वो इक कागज़ कुछ भीग गया
    ©Nitin Ahlawat

  • nemesis 46w

    Originally posted by : @hanaee
    #hinglish #ashk @ashk_ankush

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    Challenge Accepted

    A person sits to paint on a blank paper
    Closing his eyes; thinking of her
    Trying to paint the memories they've shared together
    Though, it hurts him more
    Just to turn that blank paper into a masterpiece


    @hanaee

  • bloomingdemon 46w

    हीर

    इक कोरे कागज पर वो
    एक तस्वीर बनाने बैठा
    सपनों में जो आती थी
    वो हीर बनाने बैठा

    उलझ रहा था उसका मन
    कैसे वो शुरुआत करे
    परियों की रानी दर्शाए
    और फूलों की बरसात करे

    इन जलते बुझते खयालों में
    वो खो गया बीती यादों में
    याद आ गई हीर उसे जो
    बिछड़ी थी पिछ्ले भादों में

    था प्रेम बड़ा ही गहरा उसको
    बस एक झलक पे झूमा करता
    लिख लिख के ख़त अरमानों से
    गली में उसकी घूमा करता

    छत पे जब भी दिख जाती
    चाँद सा वो खिल जाता था
    ख़त से लिपटा पत्थर फेंकता
    दौड़ के फिर छुप जाता था

    वो चुपके से फिर ख़त पढ़ती
    और हंस के ओझल हो जाती थी
    शर्माना चाहे कम ना हो
    पर छुप के मिलने आ जाती थी

    बातों में उसकी वो खो जाता
    मुस्कान भी हद से प्यारी थी
    ना वो समझा ना वो समझी
    ये रूहों की रिश्तेदारी थी

    फिर एक सुबह जब वो जागा
    हर ओर ही चीख पुकार थी
    दौड़ के पहुँचा उसके मोहल्ले
    पर वो गालियाँ अब सुनसान थीं

    जान गया पहचान गया वो
    ये नफरत मज़हब वाली थी
    प्यार था उसका ख़ुदा के जैसा
    पर सबके लिए तो गाली थी

    "वो हीर मेरी, बस मेरी थी
    अब कहाँ गई सब छूट गया"
    आँसू पालकों से झर झर जाएँ
    जन्नत का प्याला टूट गया

    सालों जैसे अब दिन गुज़रें
    वो चाह के भी ना भुला सका
    हर वक़्त दिखे बस चेहरा उसका
    बमुश्किल आंखो को सुला सका

    फिर एक सुबह जब वो जागा
    मुस्कानों से चमक रहा था
    यूँ तो आँसू थे पलकों में
    पर खुशियों से महक रहा था

    राज़ किसी को पता नहीं पर
    आई थी वो ख्वाबों में
    बोली "तुम क्यूँ गुमसुम हो
    देखो ना मेरी आँखों में"

    "हूँ दूर तो क्या ज़ुल्म हुआ
    यूँ खुद को क्यूँ जला रहे तुम
    उस चाँद तले ही तो हैं दोनों
    इस बात को क्यूँ भुला रहे तुम"

    "लिखा है मिलना ग़र किस्मत में
    मिलवाना भी तो इसको है
    क्यूँ डरना और क्यूँ रोना
    दुनिया की चिंता किसको है"

    "पर एक वादा कर के जाऊँगी
    'ना' तुम कह नहीं पाओगे
    हर रोज़ ख्वाब में आ जाऊँगी
    जो तुम ख़ुश होके मुस्काओगे"

    आज तलक उम्मीद बंधी है
    एक दिन तुम मिल जाओगी
    दिन इंतज़ार के पूरे होंगे
    सपनों से 'सच' हो जाओगी

    वो हंसता है अब गाता भी है
    दुनिया में रहना सीख गया
    ना तस्वीर बनी ना कुछ और मगर
    वो इक कागज़ कुछ भीग गया
    ©Nitin Ahlawat

  • ariachez 46w

    I'm so so late �� but still I want to post it.
    The idea behind this poem came from Shatter me series of Ms Tahereh Mafi. I can't remember all the nitty-gritty of the story but the essence is the same.

    #hinglish #ashk

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    A person sits to draw on a blank paper
    Her face white void of emotions, a poker
    Pen already in position, paper waiting
    But how could she start if she's facing the ceiling.

    Then the rain started falling from high above
    Making tik-tik-tik sound on the only window pane
    She could smell the earth mixed with water, the moss
    She could hear the wings flapping looking for refuge

    The thick metal walls started to get cold
    For 243 days, she already memorized its allure
    Indifferent in some days, cold in winter
    But she loves the walls for it is the witness of her suffering soul.

    She was locked up, put into an asylum.
    For something she didn't know she's capable of
    And even before she could spill the truth
    Her parents approved of her sentence and desolation.

    On the paper she bring her attention back
    And realized it's the last of her small notepad
    So she just neatly placed a small note on the paper
    '243rd day of being an innocent murderer.'


    ©ariachez

  • ujjayini 46w

    Sorry for the late updates.
    #hinglish #ashk @ankush_ashk

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    I am a blank paper

    Hi, I am a blank white paper, there is some contest has been declared through some well known app, oh! I just forgot that name, but the person who is the owner of mine, is excited about that and think what can he write.
    I am waiting for his pen to run over my chest and to express his feelings replacing mine. I am like your dream, you dreamt and when you faced the reality you get pain and after sometimes you forget it. I know you also will forget me, but I will remember you, you are my master,even if I forgot myself but, still I will remember you.
    My favourite hobby is to read the feelings of my owner and keep it secret. Although it hurts me, But still I love my job. Because I become my owners best friend for once.
    Sometimes I am afraid that if he throws me away or tears me into pieces. Yeah, it hurts but still he is my owner, I am his servant and he can do anything to me. He bought me with money. But do you really think that I can be bought with money? Your thoughts, your feelings, I keep it secret, do you think it can be measured it by money?
    Breakup story, first love story, dream story are shared very often, but have you heard a pain story of a blank paper?

    Manashi

  • jmayank1 46w

    एक कोर कागज पर वो तस्वीर बनाने बिठा..
    क्या बनाये, कैसे बनाये ये सोच कर वो ऐठा..!

    क्यों न बनाया जाये दिल, जिसके टुकड़े हो हज़ार..!
    टुकड़े इतने थे की सोचकर ही समय दिया गुज़र।

    फिर सोचा क्यों ना उसकी तस्वीर बना दू..!
    वो बैठी हो बगल में, उसके नखरे कागज़ पर उतार दू।

    बस इसी ख्वाबो में उसका दिन निकल गया था..!
    सोचते-सोचते वो कागज कोरा ही रह गया था।

    M.J.

  • kish_mehra 46w

    Ek kore kagaz pr vo ek tasveer banane baitha,
    Apne khayalo ko vo ek anjaam dilane baitha...
    Dhero yade fir apna roop lene lagi,
    Bhoole chehro par se dhund hatane lagi...
    Muddatto bad aj fir vo ateet se ghira tha,
    Ansu aj fir un rukhi palko se gira tha...
    Doob gaya tha fir vo unhi andheri raho me,
    Sath choda tha uska jaha uske hi sayo ne...
    Badi mashakkat se fir vo lauta us kore kagaz par,
    Muskurati si tasveer bna di thi usne jis par...
    Yhi muskan ab use zmane se bachati hai,
    Ashko ko uske ab khud me dafnati h...


    ©kish_mehra

  • nitin_ahlawat 46w

    हीर

    इक कोरे कागज पर वो
    एक तस्वीर बनाने बैठा
    सपनों में जो आती थी
    वो हीर बनाने बैठा

    उलझ रहा था उसका मन
    कैसे वो शुरुआत करे
    परियों की रानी दर्शाए
    और फूलों की बरसात करे

    इन जलते बुझते खयालों में
    वो खो गया बीती यादों में
    याद आ गई हीर उसे जो
    बिछड़ी थी पिछ्ले भादों में

    था प्रेम बड़ा ही गहरा उसको
    बस एक झलक पे झूमा करता
    लिख लिख के ख़त अरमानों से
    गली में उसकी घूमा करता

    छत पे जब भी दिख जाती
    चाँद सा वो खिल जाता था
    ख़त से लिपटा पत्थर फेंकता
    दौड़ के फिर छुप जाता था

    वो चुपके से फिर ख़त पढ़ती
    और हंस के ओझल हो जाती थी
    शर्माना चाहे कम ना हो
    पर छुप के मिलने आ जाती थी

    बातों में उसकी वो खो जाता
    मुस्कान भी हद से प्यारी थी
    ना वो समझा ना वो समझी
    ये रूहों की रिश्तेदारी थी

    फिर एक सुबह जब वो जागा
    हर ओर ही चीख पुकार थी
    दौड़ के पहुँचा उसके मोहल्ले
    पर वो गालियाँ अब सुनसान थीं

    जान गया पहचान गया वो
    ये नफरत मज़हब वाली थी
    प्यार था उसका ख़ुदा के जैसा
    पर सबके लिए तो गाली थी

    "वो हीर मेरी, बस मेरी थी
    अब कहाँ गई सब छूट गया"
    आँसू पालकों से झर झर जाएँ
    जन्नत का प्याला टूट गया

    सालों जैसे अब दिन गुज़रें
    वो चाह के भी ना भुला सका
    हर वक़्त दिखे बस चेहरा उसका
    बमुश्किल आंखो को सुला सका

    फिर एक सुबह जब वो जागा
    मुस्कानों से चमक रहा था
    यूँ तो आँसू थे पलकों में
    पर खुशियों से महक रहा था

    राज़ किसी को पता नहीं पर
    आई थी वो ख्वाबों में
    बोली "तुम क्यूँ गुमसुम हो
    देखो ना मेरी आँखों में"

    "हूँ दूर तो क्या ज़ुल्म हुआ
    यूँ खुद को क्यूँ जला रहे तुम
    उस चाँद तले ही तो हैं दोनों
    इस बात को क्यूँ भुला रहे तुम"

    "लिखा है मिलना ग़र किस्मत में
    मिलवाना भी तो इसको है
    क्यूँ डरना और क्यूँ रोना
    दुनिया की चिंता किसको है"

    "पर एक वादा कर के जाऊँगी
    'ना' तुम कह नहीं पाओगे
    हर रोज़ ख्वाब में आ जाऊँगी
    जो तुम ख़ुश होके मुस्काओगे"

    आज तलक उम्मीद बंधी है
    एक दिन तुम मिल जाओगी
    दिन इंतज़ार के पूरे होंगे
    सपनों से 'सच' हो जाओगी

    वो हंसता है अब गाता भी है
    दुनिया में रहना सीख गया
    ना तस्वीर बनी ना कुछ और मगर
    वो इक कागज़ कुछ भीग गया
    ©Nitin Ahlawat

  • pukethesea 46w

    Clouds

    A person sits to paint on a blank paper. She hoped every person would understand her work.
    So, with dollops of various shades of blue and white, she created clouds.

    After all, everyone finds, in clouds, what they wish to see within them.

    #pukethesea

  • ankush_ace 46w

    एक कोहरे कागज़ पर वो एक तस्वीर बनाने बैठा ,
    बिना कुछ सोचे बिना कुछ समजे आपने प्यार को कागज पर सजाने बैठा।
    सोचा था उसने बनाए गा वो ऐसा चेहरा ,
    जिसमे दिखे उसके प्यार का रंग गहरा।
    बनानी थी उसे अपनी तक़दीर और,
    अंत में बना दी उसने अपनी ही माँ की तस्वीर।

    ACe

  • dishahegde 47w

    I've been having writer's block since a few days. This was but a poor attempt to break through it.
    #sol_hi_bye @shades_of_love

    Try a reply to this? @ashk_ankush #ashk

    @readwriteunite @writersnetwork @writersofmirakee @mirakeeapp

    #tfios @writings_of_my_heart

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    Reckless

    'Hello, can I sit here?', asked he, hoping to make a new friend. He was the new guy, an enigma. Cliques had already been formed by now and he had spent the last two days sitting alone during the break.

    Then, he spotted her, engrossed in the latest Sidney Sheldon book. Her face glowing with a charm he had only read about in books, she sat there unaware of the dark brown eyes admiring her.

    'Sure, why not?', she said hesitantly, disappointed that she would now have to stop reading. The unraveling of the mystery behind the murders would have to wait a bit longer.

    'So, what's up? I'm Lily. And you are?'
    'Nathan'
    Silence. And then both gave each other an awkward smile.


    15 years later..

    'But Nate, why? Why did you do this to me? What about our children?'
    'I'm sorry, Lil, I just don't love you the way I did when I first saw you, reading your favourite book. You're not that Lily anymore. You've lost the fire, the passion. I just don't feel that excitement with you anymore.'
    'Oh, so I'm supposed to have all the passion and energy while I slog the entire day at the hospital and raise our children, while you laze around the house, sneak behind my back and cheat on me? How amazing! How lucky I feel to have met you, Nathan!'

    And that day, he walked out on her, leaving behind much more than their children and his responsibilities towards his family.

    He left behind a broken heart, shattered dreams. All without a well deserved goodbye.

    -DH
    ©dishahegde

  • ivy_words 47w

    #ashk @ashk_ankush
    Dude @dhruv_s I've always wanted a collab on this one!! See if your head comes up with something��

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    And when I fell for you
    I didn't consider the heights.
    Neither did I consider the depths
    When I drowned in your love.

    Ivy