#scream

176 posts
  • panda_queen 10h

    You're a scream in my head.
    But, I'm not even an mumble in yours.

    ©panda_queen

  • jpgillman_poetry 1w

    Purple Dusk Star

  • garima_deeva 2w

    Nothing but lost screams were left
    As he walked away from her

    Her throat raw
    Her eyes red
    And
    Her heart an open wound

    ©garima_deeva

  • alex_jusso 2w

    #pod #openyoureyes #mirakee #writersnetwork #rwu #readwriteunite #mirrors #glass #sky #broken #beauty #beautiful #chaos #shards #demise #eyes #skin #scarred #unbroken #mirror #corrupted #thoughts #taunt #taunting #venom #poison #venomous #hate #hateful #words #sting #breathe #escape #society #reflection #reflect #caged #trapped #grasp #found #truth #free #freedom #surrounded #deception #scream #cry #disaster #open #broke #shatter #shattered #fall #falling #tear #last

    It is a little hard to read so here it is.

    Glass shards fall from the broken sky, as I look up with broken eyes at the beauty that would be my demise.
    Glass shards glide upon the very skin already scarred by the unbroken mirrors corrupted thoughts. Taunting me with the venomous sting of the hateful words you breathe. And when I escaped society's reflection and grasp, all I found was a world of mirrors and glass. The truth was, I was never free, only trapped. Surrounded by my own reflection, caged by my own deception. As I screamed and cried for disaster, the sky opened up, broke and shattered. The beautiful chaos of the falling glass was the thought of the tear that was my last.

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    Mirrors

    Glass shards fall from the broken sky, as I look up with broken eyes at the beauty that would be my demise.
    Glass shards glide upon the very skin already scarred by the unbroken mirrors corrupted thoughts. Taunting me with the venomous sting of the hateful words you breathe. And when I escaped society's reflection and grasp, all I found was a world of mirrors and glass. The truth was, I was never free, only trapped. Surrounded by my own reflection, caged by my own deception. As I screamed and cried for disaster, the sky opened up, broke and shattered. The beautiful chaos of the falling glass was the thought of the tear that was my last.

    ©alex_jusso

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • silent_scream 2w

    मुद्दतों बाद आज कुछ अल्फ़ाज़ समझ आए हैं,
    न जाने कब कहाँ कैसे क्या ये कहने आए हैं,
    आज रोकने की जगह ओलो की तरह बरस से गये हैं
    ये अल्फ़ाज़ नहीं अंगारे नजर आए हैं

    हर तरफ खुशी का माहौल,
    खुद हंसते , दुसरो को हँसाते
    अंदर की मायूसी छुपाते आये हैं,
    अल्फ़ाज़ नहीं,राज़दार हैं ये मेरे,
    जब नहीं होते हैं साथ,
    तो मुझको एक झलक के लिए तरसाते आये हैं,
    ये अल्फ़ाज़ नहीं , चाँद-ए-ईद हैं
    इस मर्तबा एक सच्चाई बतलाने आए हैं ।

    कह रहे हैं , जोर से बोलेंगे तो कहीं प्रलय न आ जाए,
    चीख रहे हैं, कहाँ है वो शबनम की हसीं,
    मचल रहे हैं, उसकी एक अदाएगी के लिए,
    कुछ बोल नहीं पाए हैं, कुछ राज दफना आये हैं,
    अलफाज़ नहीं, बही हैं मेरी ज़िंदगी के,
    खुलने दो, बिखरने दो,
    ओसो की बूंदों को आज पिघलने दो,
    अलफाज़ नहीं , सुनामी हैं,
    आज बह गए तो , कर जाएंगे तबाह सबको,
    पर अलफाज़ हैं,
    शांत रखूंगा कुछ और दिन,
    रह लेंगे, जैसे अब तक रहते आये हैं ।

  • mkandres 3w

    The Story

    They say that every abandoned building has a story to tell. As I looked at the old farmstead-style house from the cracked sidewalk, I wondered what sort of tale it would weave.

    Why had it been abandoned? Had an elderly couple just given up on it and moved to a warmer climate? Had the city purchased it in order to construct a mega highway that never materialized?

    I chewed at my bottom lip; contemplating. Soon, my thoughts got the better of me. I had to inspect the crumbling home for clues. Nancy Drew would be proud.

    As I drew closer, neglect became more evident. The windows were covered in smudges of dust. Yellowing newspapers were piled in a corner on the front porch. Dark weeds grew thick and threatened to strangle my kneecaps.

    My knock on the door produced no one to welcome me. I knew it wouldn’t.

    The hinges on that door as I opened it let out an ear piercing screech. If anyone was inside they could probably already smell the stench of my fear.

    The lime green carpet was stained with God-only-knows-what and dust covered every available surface.

    A rat the size of a small dog ran across the toe of my sneaker and I muffled a scream. I had to keep my wits about me. I was here for answers, not to spook myself.

    The house seemed tired and somehow sad in its shades of black and grey. Oh how I wish it could speak.

    Cobwebs clung to sheet-covered furniture and the distinctive smell of mildew permeated the air. But, I could tell immediately that the place had once been a beauty to behold.

    Weak sun rays from the dusty window glass caused an overhead chandelier to twinkle. Rose-patterned wallpaper in the kitchen somehow seemed cheery and bright.

    And then I noticed the small porcelain doll adorned in an old-fashioned dress and bonnet. She was propped on a sideboard, a sepia-toned photograph in her rigid fingers.

    I peered at the image within the four corners. What was it? I squinted. A young girl? Aged ten or eleven maybe?

    I flipped the picture over in my hands. Written on the back was “Angela – 1898.”

    How strange, I thought. There was no dust on the doll or the photo.

    Turning toward the next room, a cold shiver ran down my spine and a silent scream caught in my throat.

    How had she emerged from the photograph? How had she gotten into the house? Why was she coming at me with a knife?

    --Melissa Andres
    ©mkandres

  • thedarkvoice 3w

    And I will shatter the horizon with my echoing screams. I will melt the sun with my confidant glare.
    I will never stop, I will never end.
    I might feel anything but I'm not weak.
    I might be anyone but I'm not a liar.
    I might be anywhere but I'm not lost.

  • practicallytheoretical 3w

    Like that hard lump in our throat,
    Are some veiled but wailing voices,
    Claiming unacceptably awful truths,
    That scream to be heard once,
    Only if we could give that time,
    Which we so gladly wasted on loving others,
    Only if...

    ©practicallytheoretical

  • anyamhne 3w

    And one day,
    an inner voice of his dead soul,
    started to scream...
    " Chase your faded dreams "

    ©anyamhne