• adityadalvi25 22w

    एक पल वाली खुशी

    एक पल वाली खुशी एक पल तक ही सीमित होती है
    जैसे जैसे पल चला जाता वैसे ही खुशी ढल जाती है
    पर हर बार मजा नही मिल पाता उसका चाहे वो मजबुरी से हो या हालातो की वजह से
    एक बार बिगड गया तो गया, भले चाहे कीतने भी जुगाड करवालो खुशी के मजे की कोई वापसी नही होती
    अगर देरी से भी एहसास हो जाता ऐसे खुशी का
    तो फिर भी महसुस नही किया जा सकता उसको
    क्योकीं ना उसका कोई अंदाज लगता ना ही उसका राज समज आता
    कुछ ऐसे ही होती है ये एक पल की खुशी
    बहुत समय के बाद अपनाने को भी मिली ना तो कोई मायने नही रखती
    बस युही एक साधारण सी याद बनती है
    ना ही उससे मन बिखर जाता है और ना ही सुधार जैसा होता वैसे ही रहता है
    बेमतलब सी बन जाती है ये एक पल की खुशी जो उसी पल खुशी के रंग ना ला पाती
    पता नही क्यों फिर भी तलब उसकी लग जाती है
    वैसे कोई मोल नही होता इनका पर बहुत जादा किमती समय की होती है ,ये खुशीया
    देर से या देर के बाद आजमाया नही जा सकता क्योकीं
    उसका स्वाद अगर एक बार मनसे उतर गया ना तो चाहे लाख कोशीश करो उन्हे ढंग से चखा नही जाता
    बस एक पल की खुशी होने की खातिर दिल मे या याद मे रखा जाता है





    ©Aditya Dalvi