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    ����क्या समझी हमने ? ����


    बहुत नाम दिए हमने देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वालो को -
    कभी कहा देशभक्त कभी शहीद कहा
    कभी शूरवीर तो कभी लाल माटी के।
    पर नाम देकर क्या अहसान किया उन पर।
    जब समझी ही नहीं उनकी देशभक्ति की कीमत।
    मातृभूमि के लिए लुटायी उनकी जान की कीमत।
    उनकी रक्त रंजित मुस्कान की कीमत।
    क्या समझी हमने अपना कलेजा का टुकड़ा
    शहीद करने वाली मांँ की कीमत।
    आया होगा कफन मे लिपटा हुआ शीश उसके लाल का।
    क्या समझी हमने उस अश्रुपूरित ह्दय से श्रध्दांजलि देने वाले पिता की कीमत।
    क्या बीती होगी उस बहन पर, जब कटी होगी शत्रु की तलवार से उसकी राखी की डोरी।
    क्या समझ पाये हम उस सूनी राखी की कीमत।
    क्या सोचा होगा तिरंगे ने जब लिपटा होगा उस
    शहीद के तन से।
    क्या समझ पाये हम तिरंगे की वो टूटी हुई हसरत।
    भारत माता के जयघोष से जो कभी गुंजाते थे
    नील गगन को।
    काश समझ पाते आज हम उनके मौन की कीमत।
    काश समझ पाते उन लाखों जानो की कीमत
    उन शहीदों की कीमत, उनकी शहादत की कीमत।
    उन टूटी हुई चूड़ियों की कीमत।
    और
    उजडीं हुई माँगो की कीमत।

    वन्दे मातरम् ����
    हरे कृष्णा �� ©rolipoetry

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    देशभक्ति

    ����क्या समझी हमने ? ����

    क्या सोचा होगा तिरंगे ने जब लिपटा होगा उस
    शहीद के तन से।
    क्या समझ पाये हम तिरंगे की वो टूटी हुई हसरत।
    भारत माता के जयघोष से जो कभी गुंजाते थे
    नील गगन को।
    काश समझ पाते आज हम उनके मौन की कीमत।
    उन शहीदों की कीमत, उनकी शहादत की कीमत।
    उन टूटी हुई चूड़ियों की कीमत।
    और
    उजडीं हुई माँगो की कीमत।

    वन्दे मातरम् ����
    हरे कृष्णा �� ©rolipoetry