• saurabh_09 16w

    मैं

    खामोशी की छिपाकर , हँसी में दबाकर
    उम्मीदों के बोझ में , नये सफर पर निकला ही था
    कि
    उसकी यादें , मजबूरीयों का सहारा लिए
    माफी माँगने आ गई , बेवक्त ।

    ©saurabh_09