• arshaa 6w

    ❤ माँ ❤

    अक्सर सोचती हूँ...मां कैसी होती है
    शायद वो धरती माँ जैसी होती है
    ढेरों सौगातें वो देती है
    हर ग़म ख़ुशी में बदल देती है...
    बिना किसी चाहत के
    बिना किसी मन्नत के
    वो सब कुछ दे देती है
    बच्चों को डांट के
    चुपके से अक्सर रो देती है

    अक्सर सोचती हूँ...मां कैसी होती है
    शायद वो जन्नत की देवी सी होती है
    अपनों के वास्ते ढ़ेर सारा प्यार
    दुश्मनों के लिए ज्वाला
    आंखों में भर लेती है
    माँ सबकी झोली भर देती है
    कभी वो चहकती चिड़िया सी होती है
    कभी मासूम गुड़िया सी होती है
    मां तो बस मां है...
    वो एक जादू की पुड़िया सी होती है

    अक्सर सोचती हूँ..माँ कैसी होती है
    वो सहनशीलता की मूर्ति सी होती है
    वो कुमकुम सी पवित्र और
    कमल सी सुंदर होती है
    एक मां है ..जो सदा दुआ देती है
    रिश्तों को जोड़ना सिखाती है
    मुसीबतों का रुख मोड़ना बताती है
    अपने ममता की छांव में
    जीवन का हर पहलू समझाती है

    कितना कुछ बदलता है समय के साथ
    पर वो सदा पास रहती है।
    उलझन में हमारी वो
    शक्ति बनकर साथ देती है
    माँ तो बस माँ है
    वो सबसे न्यारी होती है
    माँ सबसे प्यारी होती है

    अक्सर सोचती हूँ ...माँ कैसी होती है
    शायद वो महकती बगिया सी होती है
    या भोली मुस्कुराहट सी होती है
    शायद वो एक वरदान जैसी होती है
    नहीं...माँ तो सिर्फ़ भगवान सी होती है
    हां...माँ तो सिर्फ़ भगवान सी होती है


    ©अर्शा_°N°