• kavish_kumar 10w

    तेरे शहर में रहकर तेरी बात करता हूं..
    तुझसे ना सही,तेरे दोस्तों से मुलाकात करता हूं..
    जो तू हो सामने तो निर्निमेष देखता रहता हूं..
    इन सभी बातों को पंक्तियों में कहता रहता हूं..
    मेरे दिल में सर्वत्र तुम्हीं को पाता हूं..
    तुम मेरे गीतों में हो, ये खुद को समझाता हूं..
    तेरी रजा होती है तो ही बतियाता हूं..
    तेरे पास होने के अहसास से मुस्कुराता हूं..
    ©Aatish ��