• kaaran 5w

    (इंतज़ार)

    दूर खड़ा मैं उस मकान को देख रहा था 
    जो खड़ा था आसमान में सीना तान के 
    अब कोई रहता नहीं था वहाँ पे 

    रंग उसके फ़िके पड़ चुके थे 
    खिड़किया सारी टूट चुकी थी 
    अंदर से पूरा खोखला हो चूका था 

    डरता होगा वह भी अँधेरे के सन्नाटे से 
    रोता होगा रोज अकेलेपन के विचार से
    वो मकान था किसी के इंतज़ार मे

    ©kaaran