• wordsofvyan 18w

    Ab fark nhi padta

    एक वक़्त था जब तेरे चहरे की एक मुश्कन के लिए
    हम सों सों सदिसे रचते थे ,
    अब तो तू डुबो दे ख़ुद को भी जामैं , ग़म मैं मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता।।
    एक वक़्त था जब तूजे पाने के लिए रब से फ़रियाद करता था ,
    अरे अब तो मुझे मेरा रब भी बुला दे तो मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता ,
    की वो वक़्त ओर था जब ये दिल तुजसे प्यार करता था ।।


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