• harshal_batra 23w

    बच्ची गिरा दिया करते थे लोग के लड़की है दहेज दे ना पड़ेगा ,
    अब गिरा दिया करते हैं के कही दुष्कर्म न हो जाए |

    अरे लड़की तो छोड़ो आठ महिने की बच्ची को नही छोड़ा,
    किसी गैर को तो छोड़ो खुद की बेटी को नही छोड़ा |

    गैरो से तो फिर भी बचा लेंगे अपनी परियों को,
    अपनो के खौफ से कैसे बचाएँगे नन्ही कलियों को|

    खून मे लथपथ वो नन्ही सी जान किस तरह बिलबिलाइ होगी,
    ओर उस नामर्द हैवान को फिर भी शर्म नही आई होगी|

    जब नन्ही किलकारीयों के गले घोंट दिए गए,
    एफ. आइ.आर करने के बदले भी युँ नोट लिए गए|

    शर्म आनी चाहिए हम लोगो के आज भी देश में हिंदू-मुसलमान कह कर लड़ते रहते हैं,
    अरे भाईयों जाती-धर्म से हटकर भी इस धरती पर एक श्राप है जिसे हम सहते रहते हैं |

    वो रात बडी काली थी जब वो तेरह साल की बच्ची दो पैरो वाले जानवरों का शिकार हुई,
    उस रात उसकी इज्जत तो तार-तार हुई ओर इंसानियत भी शर्मसार हुई |

    आधी रात को कोई जानवर पास से गुज़र जाए तो लड़की एक बार को ना भी डरे,
    पर किसी आदमी को गुज़रता देख उसकी रूह ज़रूर काँप जाएगी|

    आखिर क्यू उस बच्ची के बचपन से खेल गया कोई,
    जंगली जानवरों की तरह झिंझोड गया कोई |

    अब इंसानियत पर मेरा कोई विश्वास नहीं रह गया,
    जानवरों से ज्यादा विचारहीन आज यह इंसान बन गया |

    कोई ना बचा शरीफ कलयुग यह घोर हैं,
    संत महात्माओ मे भी छुपा एक चोर हैं |

    कभी सोचा है के गम के आगोश मे उसकी आहें कैसी होगीं,
    बस दुःख दर्द और तनहाईया ही साथ निभाती होंगी|

    सिसकीया जिसकी चीखो मे बदल जाया करती है,
    और आँसूओ के सागर मे वो डुबकीयां लगाया करती है |

    वो तो रोते रोते सो गई सदा के लिये, और श्मशान भी पहुँच गई चिता के लिए |

    अब उन दरिंदो को सजा कौन पहुँचाएगा? क्या अब भी यह ज़माना उनसे घबराएगा?

    जाते जाते वो बच्ची बेबस नज़र से मानो युँ कहती होगी,
    के रखलो लाज अब भी बहना की वरना अगली बार फिर कोई बहन शर्मसार होगी|

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    कुचल दिए गए पंख (See caption)
    ©harshal_batra