• durgeshkumar 37w

    नव वर्ष

    चारों तरफ खुशहाली है, देखो आया नववर्ष
    मन भी प्रफुल्लित है, हृदय में छाया उत्कर्ष
    दिल में छाया उत्कर्ष, दुविधा मन में झूमे है
    चाचा हिजरी हे मानें,ताऊ चैत्र मास में घूमें हैं
    कह दुर्गेश संभलकर, बर्षों में भी न आली है
    हर माहीने में नववर्ष, हमेशा यहाँ खुशहाली है
    दुर्गेश कुमार सराठे
    ©durgeshkumar