• zindagi_ek_nazm 3w

    दिल की पतंग को तुम्हारी मुस्कान से फलक तक ले जाना ही आइना-ए-दिल है। महक उठा है आँगन, वो ख़ुशबू लौट आई है पतंग से । जिसका उड़ना ही वो जन्नत है मेरी फिर मैं जहन्नुम क्यों लिखूँ? बहुत खुशनसीब हैं ये आँखें, जिनमें ख़्वाब रहते हैं । कटी पतंग का रूख था तुम्हारी तरफ़..जो भूले-भटके ख़्वाब दस्तक दे गया चौखट पर कटी पतंग के मिलने का नहीं पता पर तुम्हारा निहारना ही व्योम सा सुकून दे गया मुझे, क्योंकि इश्क़ कभी आखिरी बार नही होता

    ©अतुल कुमार दुबे


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    लप्रेक

    दिल की पतंग को तुम्हारी मुस्कान से फलक तक ले जाना ही आइना-ए-दिल है। महक उठा है आँगन, वो ख़ुशबू लौट आई है पतंग से । जिसका उड़ना ही वो जन्नत है मेरी फिर मैं जहन्नुम क्यों लिखूँ? बहुत खुशनसीब हैं ये आँखें, जिनमें ख़्वाब रहते हैं । कटी पतंग का रूख था तुम्हारी तरफ़..जो भूले-भटके ख़्वाब दस्तक दे गया चौखट पर कटी पतंग के मिलने का नहीं पता पर तुम्हारा निहारना ही व्योम सा सुकून दे गया मुझे, क्योंकि इश्क़ कभी आखिरी बार नही होता

    ©अतुल कुमार दुबे