• shubhambhatt 22w

    स्वयं

    गिरता हूँ,सँभलता हूँ,

    न जाने किसकी चाह में!

    गुस्ताखी रहे न,न शिकवा किसी से

    बस चलता रहूँ,मैं इसी राह में!!

    -Bhatt..ji..