• bharti17 15w

    वो ख़्वाब, ख़्वाब सा नहीं,
    जिसमे तेरा दीदार ना हो।
    वो महक गुलाब सी नहीं,
    जिसमे तेरा नूर झलकता ना हो।
    वो इबादत की फ़रियाद भी क्या,
    जिस रीत की तू तमन्ना ना हो।
    अब इश्क़ मुकम्मल हो जाये,
    शायद कल जहाँ में हम ना हो।
    ©bharti17