• asg_manifesting 14w

    मेरे हाथ से छूट कर यू बिखरने लगी मेरे सामने फिर से
    मैंने मुठी खोल दी और उसे हाथों में भर लिया
    ज़िन्दगी तू रेत सी है, सिख लिए है नाकामियो से
    अब दिल खोल कर मैंने जिंदगी जीना सिख लिया।


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