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    साज़िशों के कैद में हुँ हरदम जला,
    इस तन्हाई का मुझे भी है बेहद मलाल ।
    सुन ले ज़रा दिल ए हाल ,
    तुझे खोना रेत के समंदर सा,
    तेरा होना बस बीते लम्हें सा। हकीकत ना सही ख्वाबों सा रिश्ता हो तेरा-मेरा ।
    ख्वाहिश इतनी सी चंद अल्फाज़ कर दे तुझे मेरा।

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