• adityakunwar 16w

    अमीर खुसरो

    जब भी "महबूब-ए-ईलाही" का नाम जुबां पर आता है, ख्वाज़ा "खूसरो" तेरा ख़्याल सबसे पहले आता है;
    तेरा हर क़लाम बन्दे को ख़ुदा से मिला देता है,तेरे जैसा शागिर्द अगर मिल जाए हर पीर को तो उसकी ईबादत ख़ुदा तक पहुँचा देता है;

    तूने ही कव्वाली-ओ-राग-रागनियों कि रचनाओं से हिन्दुस्तान की कादीम-ए-संगीत को संवारा है,
    "तूती-ए-हिंद" ख्वाज़ा तुमने ही हिन्दवी-ओ-उर्दू भाषाएँ-ए-हिंद को उसकी पहचान देकर इस मुल्क़ की कादिम-ए-साहित्य को संवारा है;

    शहंशाह तो कई आए और चले गए पर तेरा रुतबा कभी कम हो नहीं सकता,
    तूने "मोहब्बत" का नज़राना उस शहंशाह-ए-फ़कीर की खिदमत कर दुनियां को मोहब्बत करना सिखाया ऐसा फ़नकार कभी हो नहीं सकता;

    मुराद एक ही लेकर आया हूँ तेरे दर पर,हर इनसान को तूझ जैसी तड़प होजाए इन फ़कीरों से;
    हर इनसान तक "मोहब्बत" का पैगाम पहुँच जाए धर्म की सरहदो से उठ कर,सबका सजदा कबूल होजाए इन फ़कीरों से।

    आदित्य कुंवर
    ©adityakunwar

    ख्वाज़ा हज़रत अमीर खुसरो "अबुल हसन यमीनुद्दीन अमीर ख़ुसरो" का उर्श मुबारक!