• princewrites 6w

    बहला-फुसला के दिल को अपने
    इक तरफा निभाह रहा था मैं ।

    जिस रस्ते कि कोई मंजिल नही 
    नंगे पांव जा रहा था मैं ।

    उसे शोर पसंद नही था, लेकिन
    उसके लिए गा रहा था मैं ।

    बाद मुद्दत मुझे हुआ यकीं
    इक मरे हुए को जगा रहा था मैं ।
    ©princewrites