• rahulrahi 6w

    जहान ले आया - ग़ज़ल

    अपने हिस्से का पूरा जहान ले आया,
    4 कपड़े ढाई गज मकान ले आया।

    एक शाम मैं तमाम तारे तोड़ लाया था,
    तूने भी गज़ब किया तू चाँद ले आया।

    माना है मशक्कते कमाने रोटी दाल,
    तू तो बनिए की पूरी दुकान ले आया।

    मुझमे ना हुनर उधारी दे के माँग लूँ,
    मुझको है तसल्ली तू ज़बान ले आया।

    वो जो सारे लोग मुझपे तंज थे कसते,
    वक्त बन तू सबका इम्तिहान ले आया।

    सब खुदा के घर गए ले आए ख्वाहिशें,
    तुझको सूझी क्या भला ईमान ले आया।

    काली होती जा रही, दुनिया मगर कैसे,
    तू ये साफ़ दिल बचा इंसान ले आया।

    चल चलें सफ़र बड़ा, दूर है मंज़िल,
    बाँधकर तू मौत का सामान ले आया।
    ©rahulrahi