• hearts_lines 14w

    आओ बैठो !

    आज! बरसों बाद मिले हो
    जुबान पे तो काबू न कोई
    क्यूँ दिल से चुप हो बैठे हो
    जुबां-दिल से तालमेल बने
    तब जाके मुँह से बात करो
    बैठके यहाँ चुस्की लेते हुए
    बेसब्र ; सब्र से काम तो लो
    राहें ही जब बनी अलहदा..
    तो मंजिल की न बात करो