• bobbyrahgir_1825 14w

    ज़िन्दगी में हम एक और दौर से गुजर गये।
    आज फिर अपने अपनो से दूर हो गये ।।

    आँसुओ ने भी ज़िन्दगी को कोसा होगा ।
    दर्द का दर्द से जो नाता है उसका भी हाल पूछा होगा ।।

    ज़िन्दगी जीत की हर कोशिशे नाकाम है मेरी ।
    फिर भी ख्वाहिश है ज़िन्दगी जीने में मेरी।।

    यादो की आंधी आज भी मुझ पर भारी है।
    बस इस दर्द में ही मेरी कहानी है ।।

    दोस्तो बस इतना कर्म कर देना ।
    जब भी हो दर्द मुझे तो अपना हाथ रख देना ।।

    सिपाही, चन्द्र प्रताप सिंह "राहगीर"....✍
    ©bobbyrahgir_1825