• heartdrops 6w

    "मां"

    मैं तुम्हें किन शब्दों में बयां करूं....
    जहां शब्दों के पैमाने खत्म होते हैं ....
    अक्ल के घोड़े दौड़ना बंद कर देते हैं...
    खामोशी बोलना शुरु कर देती है...
    दर्द सुकून में बदल जाता है....
    उसी जगह पर "मां" तुम्हारा अस्तित्व शुरू होता है!!
    तुम्हें बयां करने की ताब' तो मुझ में है नहीं "मां"
    बस इतना कहूंगी कि तुम "सांसे"हो
    तुम "धड़कन" हो, जितना कुछ मुझ में है...
    वह सब तुमसे है "मां"!!
    शुक्रिया यह "खूबसूरत" जिंदगी देने के लिए
    ©heartdrops