• aashu_ 10w

    दो महीने की वो हज़ारों छुट्टियां... #3

    और कहा कि चलो भी अब, नाराज़गी छोड़ो, हो गई गलती मुझसे, मान लिया मैंने। बस अब और नहीं रह सकती तुमसे बात किये बिना और तुम भी अब ज़्यादा नखरे मत दिखाओ, चुपचाप पहले की तरह बन जाओ। "
    मग़र मेरी बातों का और मेरी मोहब्बत का उस पर कोई भी असर नहीं हुआ। ऐसा महसूस हो रहा था जैसे किसी ने मुझे सात आसमानों के ख़्वाब दिखा कर, छठे आसमां पर ले जाकर ज़ोर से धक्का देकर गिरा दिया हो और मेरे हज़ारों जज़्बात राख़ की तरह बिखर कर उड़ गये हों। इतना ही नहीं, बल्कि मेरी तमाम मंज़िलों के रास्ते उसी वक़्त बदल गये थे जिस वक़्त मैंने हिम्मत करके ख़ुद को संभाल लिया था। मेरा दिल तो बेशक़ टूट गया था मग़र मैं उठी, संभली और एक नयी शुरुआत करने की सोची।
    मग़र मैंने गलत सोचा था कि मैं ख़ुद को संभाल पाउंगी और जब भी अकेले बैठी होती थी तो ख़ुद को तो संभला हुआ महसूस करती थी मग़र उसकी यादें नहीं संभाल पा रही थी। वो बेकाबू ,बेवक़्त और उसकी बेहिसाब-सी यादें,मेरी ज़िंदगी का बहुत बड़ा मसला बनती जा रही थी फिर दिल ने जैसे-तैसे हिम्मत दिखाई और मैंनें कलम उठा ली और कर दी शुरू अपनी दास्तां-ए- इश्क़। ये दास्तां कभी पूरी तो नहीं हो पाई , ना ही कभी हो पायेगी, मग़र जो इल्ज़ाम और दर्द मोहब्बत से इनाम में पाये हैं, उनका हिसाब तो करना ही पड़ेगा न? बेशक़ वो साथ जीने-मरने के तमाम वादे टूट गए और वो उन्नीस उपहारों का इंतज़ार भी कभी ख़त्म नहीं हो पायेगा मग़र बरखुरदार, यादों का ख़्याल तो रखना पड़ेगा न? दिल के इस बंद-सेे डिब्बे में यादों को छुपाकर तो रखना पड़ेगा न?
    बेशक़ अब भी कभी-कभी उससे आंखें चार हो जाया करेंगी मग़र अब वो किस्सा कभी नहीं दोहराया जायेगा। वो किस्सा, जो उसने तमाम वादों के साथ शुरू किया था, वो कभी पूरा नहीं हो पाएगा। वो नज़ारे, जो उसने अपनी आंखों से मुझे दिखाने के वादे किये थे, वो देखने अब मुमकिन नहीं हो पाएंगे। आसमां के वो चमकते-से चांद-सितारे और वो बेमौसम-सी इश्क़ की बहारें, सब रूठ गये हैं, आज मोहब्बत के सारे ख़्वाब टूट गये हैं।
    कुछ किस्से बस किस्से ही रह जायें तो बेहतर है, कुछ कहानियां बस अधूरी ही रह जाये तो बेहतर है। इस बात का मलाल तो सारी उम्र रहेगा कि हमारी कहानी भी बाकियों की तरह अधूरी रह गई मग़र मैं कोशिश करूंगी कि उसे लिखते-लिखते अपनी शामें बिता लिया करूं और उसे पढ़ते-पढ़ते अपनी रातें काट लिया करूं। तब हम कितना खुशी-खुशी कहा करते थे कि गर हमें तमाम उम्र भी गुज़ारनी पड़े तो हम इन यादों के सहारे बेझिझक गुज़ार लेंगे,क्यूंकि जीने के लिए एक-दूसरे की यादें ही काफ़ी हैं।
    मग़र सच कहूं आज दिल को, दिन को, सुबहों-शामों को, इन उजालों को और अंधियारों को उसके चले जाने का बेहद शिद्दत भरा अफ़सोस है, और ये कमबख्त हमेशा रहेगा। दो महीने की वो छुट्टियां उसके लिए महज़ दो दिन जैसी रही होंगी, मग़र मेरे लिए वो पूरे हज़ार दिन थे।
    अब बस कुछ खूबसूरत यादें हैं। उसके वो रूह को छू लेने वाले एहसास आज भी ज़िंदा हैं और मौत तक ज़िंदा भी रहेंगे।
    हमारी मोहब्बत की ये अधूरी कहानी कयामत तक ज़िंदा रहेगी, मेरे अल्फाज़ों को जज़्बात बना कर मैं उसे, हमें और हमारी अधूरी कहानी को अनंतकाल तक ज़िंदा रखूंगी,ये वादा है मेरा अपने टूटे हुए दिल से और इन बिखरे हुए जज़्बातों से ।
    अब बस यादें ही काफ़ी.....
    ©his_shadow