• ansuljhe_lafz 15w

    ग़ज़ल

    मैं चाहता हूं कि मुझको गिराये लोग।
    जो जाते हैं तो ज़िन्दगी से चले जाएं लोग।।

    ये रास्ता बेहद लम्बा और मुसीबत भरा है,
    मेरी तम्मन्ना है कि इसी पर से आये-जाये लोग।

    गिराने वाले झट से जमीन पर गिरा देते है,
    जरूरी नहीं है कि माथे पर ही बिठाये लोग।

    मैं ये नहीं चाहता कि सब पाक पवित्र हों
    कम-स-कम सोच को तो ज़हन पर सजाये लोग।

    मैं जान बूझ कर मेहनत दुगुनी करता हूँ,
    जो जलते हैं तो भीतर तक जल जाए लोग।

    मेरे मुल्क़ में कितना ज़हर और दरिंदगी भरी है,
    अगर हो मुमकिन तो शर्म से मर जाये लोग।
    ©uljhe_uljhe_words