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    बर्बादी का अभी आगाज़ बाकी है
    मिटा कश्मीर, लुटा बंगाल केरल तो क्या,
    अभी तो पूरा हिंदुस्तान बाकी है

    जयपुर में भी हो गई तैयारियाँ
    वतन को नोच कर खाने की,

    अभी मत जागो हिंदुस्तान वालो
    अभी तुम्हारे घर की,

    देहलीज़ बाकी है

    ©Shayari_Poetry