• mr_wordsmith 3w

    यादें पुरानी

    .
    जब दिन डलता है, मिलता हूं तुम्हारी यादों से;
    टूटा हुआ हूं, सिलता हूं खुद को तुम्हारी यादों से:
    सोचता हूं
    ना होती यह यादें, ना मैं इन तारों को गिनता;
    ना डूबता इनमें मैं, ना अपने दिल की गहराईओ को मिनता।
    लेकिन
    कुछ ना हूं मैं तुम्हारी इन यादों के बिन,
    यह यादें ही तो है मेरे जीने का एक सहारा,
    कुछ ना हूं मैं तुम्हारी इन यादों के बिन।



    ©mr_wordsmith