• hearts_lines 15w

    कितनी धीमी चाल है मेरी !

    मैं दौड़ रहा हूँ सुबह शाम
    रात में भी दौड़ता रहता हूँ
    सांस संग कदम बढ़ाता हूँ
    रुक के भी चैन न पाता हूँ
    कितनी धीमी चाल है मेरी
    मेरी यादें मुझे ये बताती है
    गत वषों में दौड़ता निरंतर
    रुका न आराम पल कहीं
    पर मात्र इंच हिल पाया हूँ
    भरसक प्रयास बाद उन्ही
    उठी आवाजों से घिरता हूँ
    बुलाती हैं मुझे, खींचती है
    खीचेंगी बिन थके जब तक
    उनकी गिरफ्त दायरे में हूँ
    तभी तो पता चला मुझे के
    कितनी धीमी चाल है मेरी