• rashmi_anand 23w

    #my first romantic poem
    #rashmi_anand

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    हुस्न -ए -लालिमा

    मत लुटा अपनी हुस्न -ए-लालिमा
    तेरी दीवानगी में मर जाएँगे हम

    छिड़क दे जो तू हुस्न का नूर
    टूट कर हो जाएँगे सारे दिल चूर-चूर
    गुरूर मत दिखा हुस्न-ए-लालिमा
    तेरी दीवानगी मे मर जाएँगे हम ।

    धड़कने पूछे मैं हूँ किसके नाम
    समा दिल थाम के आई है आज शाम
    खामोशी में बैठे हैं तमाम
    पर जुबान पर है सिर्फ तेरा ही नाम

    मत लुटा अपनी हुस्न-ए-लालिमा
    तेरी दिवानगी में मर जाएँगो हम !!!!
    ©rashmi_anand