• kshatrani_kalam 13w

    ऐ जिंदगी,
    तू लाख जखम दे मै फिर से मरहम-पट्टी कर मुस्कुराऊँगी ।
    ऐ जिंदगी,
    तू चाहे कितना भी बरस मैं फिर से अपने मशाल जलाऊँगी ।
    ऐ जिंदगी,
    तू सारे राह बंद कर मैं फिर एक नयी राह ढूंढ निकलूँगी।
    ऐ जिंदगी,
    तू फिर से समंदर में मुझे डुबो मैं तिनके का सहारा ढूंढ ही लुंगी।
    ऐ जिंदगी,
    बस तू जिन्दा रख ,में हर ख्वाइश मुक़मल कर दिखलाऊँगी।
    ©in_the_mid_of_life
    -क्षत्राणी