• ananyakanaujia 5w

    Ab fark nhi padta

    ये नीला सा आसमां ये भूरी सी ज़मी,ये रंगबिरंगी तितलियाँ और आँखों में ख़ुशी।मौसम कुछ शायराना सा और मिज़ाज़ खुशनुमा, ये दौड़ता सा वक़्त और ये लम्हों की कमी।। यूँ तो घुंघरू के संग मैं कभी नाची न थी,कभी बेवज़ह ख़ुद से ही बादलों संग बरसी न थी।कुछ कमी तो न लगी थी ज़िन्दगी में आज्,पहले क़भी आँगन में ऐसी रौशनी न थी।। अपनी मुट्ठी को बच्चों सा फ़िर भींचा है मैंने, अपने सुने से मन को उपवन सा सींचा है मैंने।उदासी अब नज़दीक नही आने देती,क्योंकि आसुंओं को भी अमृत अब समझा है मैंने।। मानती हूँ कुछ हुआ था एक वक़्त पे मुझे, अब उस वक़्त को मुझमे उसकी मिलती नही सरज़मीं। खुशियों को आँचल में समेट अपने रखती हूँ,अब जो नही है उसकी उम्मीद मुझे देता नही नमी।।
    ©ananyakanaujia