• shashiinderjeet 5w

    #नीरसता
    शुष्क हुए प्रेम के झरने
    नैनन नीरस हो गये अपने
    हलचल हीन हुआ हृतल
    वेदना में उर है प्रबल
    ओष्ठ मुस्का नहीं पाते
    मुखड़े पे पीड़ा ले आते
    नैनन अश्रु सूखे अपने
    सर्व स्वप्न टूटे अपने
    कोई तो हो भौर जो लाए
    उर में नव पुष्प खिलाए
    चमक चक्षुओं में लाए
    उल्लासित उर हो जाए
    विचार सुन्दर हो अपने
    भाग्य खिलें सब अपने
    कोकिल राग सुर में गाए
    मयूर नृत्य कर रिझाए
    फूट पड़ें प्रेम के झरने
    फिर से उर मेरा मुस्काए
    ©shashiinderjeet

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    नीरसता

    शुष्क हुए प्रेम के झरने
    नैनन नीरस हो गये अपने
    हलचल हीन हुआ हृतल
    वेदना में उर है प्रबल
    ओष्ठ मुस्का नहीं पाते
    मुखड़े पे पीड़ा ले आते
    नैनन अश्रु सूखे अपने
    सर्व स्वप्न टूटे अपने
    कोई तो हो भौर जो लाए
    उर में नव पुष्प खिलाए
    चमक चक्षुओं में लाए
    उल्लासित उर हो जाए
    विचार सुन्दर हो अपने
    भाग्य खिलें सब अपने
    कोकिल राग सुर में गाए
    मयूर नृत्य कर रिझाए
    फूट पड़ें प्रेम के झरने
    फिर से उर मेरा मुस्काए

    ©shashiinderjeet