• meera____ 6w

    आकिबत - भविष्य.........इल्तिफ़ात - मित्रता
    नफ़्स - प्राण .........नाबूत - नष्ट
    नज़ाफ़त - अच्छाई, शुध्दता
    बे इम्तियाज़ - अविवेकी........बलवा - विद्रोह

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    हश्र-ओ-अंजाम क्या होता है शराफ़त का , मत पूछ
    इस बस्ती के लोगो से पता इंसानियत का , मत पूछ

    माना कि रंजिश-ओ-रश्क़ अब भी क़ायम है जहन में
    आक़िबत में असर क्या होगा इस आदत का,मत पूछ

    हम गए थे ये सोचकर कि अमन का कारोबार करेंगे
    पर क्या इनाम दिया मेरी इल्तिफ़ात का , मत पूछ

    नफ़्स झोंकने से नफ़रत नही, ख़ुद नाबूत हो जाते है
    क्या अंजाम हो सकता है इस नज़ाफ़त का,मत पूछ

    हिफाज़त करने पर तवज्जों नही तौहीन मिली है
    ख़ुद्दारी पर क्या असर हुआ इस ज़िल्लत का,मत पूछ

    बे इम्तियाज़ नही है "मीरा",बलवा कतई मक़सद नही
    फिर हालात-ओ-सबब क्या है बग़ावत का , मत पूछ
    ©__meera___