• rebelliousleo 5w

    कभी लगता है मैं कनारा हूँ और तू कश्ती सी मेरे पास आती है
    कभी लगता है मैं मुसाफिर हूँ तू कनारा बनके दिख जाती है

    फर्क नहीं की तू बड़ी या मैं बड़ा तू सही की मैं सही
    नज़रे मेरी तुझे मेरे और मुझे तेरे करीब देख पाती हैं

    हम दोनों को एक जैसा सा देख पाने के कारण ही
    कभी मैं तो कभी तू कनारा हो जाती है

    ©RebelliousLeo