• gauravdubey 6w

    मेरे दरमियाँ तो उसकी याद भी नहीं.
    वो है मगर चलो छोड़ो कोई बात भी नहीं.
    .
    वो कभी तो तसल्ली से पढ़े मुझको.
    मैं तो उस घर का अख़बार भी नहीं.
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    वो जनता है मुझे मुझसे भी ज़्यादा.
    यारों इतना तो मैं उससे मिला भी नहीं...
    .
    मेरा मुझ में कुछ तो बाक़ी रहा होता.
    बची वो भी नहीं बचा मैं भी नहीं...!!!
    ©Gaurav Dubey