• selflove 23w

    विद्यालय

    स्कूल के गेट पर खड़ी थी ,मुस्कुराकर बच्चों को देख रही थी I दिल में बहुत बवाल मचा, जैसे कोई प्यारा एहसास जगा I अलग-अलग उम्मीद लिए ,भिन्न-भिन्न हाव-भाव के साथ ,
    आ रहे थे अपने घरों से वह विद्यालय में पाने को ज्ञान I
    कोई मुस्कुरा कर ,कोई सर खुजा कर,
    एक मुंह सड़ा कर , एक खुद में खोकर
    भारी बस्ता छोटा शरीर, भारी शरीर अजीब सी चाल
    कोई अमीर कोई गरीब, कोई हिंदू कोई मुस्लिम
    प्यार से खेल रहे थे वह ,खुशी से पढ़ रहे थे वह I
    देख उनको मन में दो एहसास जागे ;
    पहला तो खुशियों से भरा;
    देखकर उनके बीच एकता प्रेम और प्यार ,
    देश की शान का हुआ एहसास I
    वहीं दूसरा एक अजीब सा प्रश्न उठा
    यहां भिन्न जाति के बच्चे हैं प्रेम प्यार से खेल रहे ,
    वही आज देश में क्यों हम
    अपनों से ही खुदगर्ज हो कर लड़ रहे ??
    जिंदगी में प्रेम को लाना होगा I
    भविष्य को हमें बचाना होगा I