• fire_cold 15w

    मुरझाई नहीं हो

    नहीं हो तुम,
    अब , नहीं हो तुम पास में ,
    फिर भी क्यों धड़कती हो
    हर सांस में ,
    क्यों जी रही हर एहसाह में ,
    जब , नहीं हो अब पास में ।।।

    जब जा चुके हो इतने दूर तुम ,
    क्यों रहता हूं यादों में गुम ,
    खोया नहीं मैंने तुम्हे ,
    खोया नहीं है मैंने तुम्हे
    हा शायद , खो दिया है तुमने हमें ,
    क्योंकि जिन्दगी अब भी चल रही है
    कुछ कहानियां गढ़ रही है
    मै तो अब भी जिंदा हूं
    तुमसे नाराज़ नहीं हूं ...
    बस तुम्हारे पास नहीं हूं
    पर क्या , सच में
    मै तुम्हारा अहसास नहीं हूं ,
    हर सांस में आने वाली आवाज नहीं हूं....

    कभी खुद से पूछ के देखो ,
    क्या मै तुम्हारी हथेलियों में
    बिखरे लकीरों को रास नहीं हूं ?
    क्या मै तुम्हारे सुबहो का आगाज नहीं हूं .....
    जा चुकी हो तुम
    फिर भी ना जाने क्यों , तुमसे नाराज़ नहीं हूं...

    फिर भी ये जानता हूं ,
    फिर भी ये जानता हूं कि खोया मैंने तुम्हे नहीं ,
    समेट तुम मुझे पाई नहीं हो ,
    क्या मेरे बिन कुछ मुरझाई नहीं हो ,
    क्या मुझे खो कर ,थोड़ा ही सही ,
    पछताई नहीं हो .......
    मैंने नहीं खोया है तुम्हे ,
    खोया तुमने मुझे है लेकिन शायद समझ
    अभी तक पाई नहीं हो......
    क्या बिन मेरे कुछ मुरझाई नहीं हो।।।
    ©fire_cold