• nehulatagarg 24w

    आपका मन और आपकी आत्मा तो हमारे रंग में रंग चुके है और पहले से ही उस रंग से सरोबार है आप । आपका मन और आत्मा तो हमारे ही रंग में पूरी तरह से भीग चुकी है जिसे आप झूठला नहीं सकती । आपकी मुस्कुराहटों में जो रंग खिलता है वो हमारा ही तो है । हमारे प्रेम के रंग की तरंगे जो आपके ह्रदय को तरंगित करती है और जो अनुभूति आपको करवाती है उसे यूँ अस्वीकार मत कीजिए अंगना । आपकी हर एक हँसी में आपके जीवन के हर एक क्षण में हमेशा से रहें है हम और हमेशा रहेंगे और आपको आश्वस्त करते है की इतना विश्वास रखिए हम पर की हम सदा आपके पास आपके साथ रहेंगे और अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी हम आपकी ही बाहों में इस संसार को अलविदा कहेंगे और हम आपके ही रहेंगे सदा । आप के आ जाने से आज हमें ही नहीं अपितु हमारे जीवन को हमारी आत्मा और हमारी सभी इच्छाओं - कामनाओं और आकांक्षाओं को आज पूर्णता मिल चुकी है अब कोई भी ख्वाहिश नहीं रह गयी हमारे जीवन में । अंगना तडपकर चित्रांगद के गले लग जाती है । चित्रांगद अपने प्रेम को व्यक्त करते हुए कहने लगते है फिर से भावुकता से - आप आ गयीं है तो वहीं हमें संसार के सारे सुख और प्रसन्नता मिल गयीं है और हमारा जीवन स्वर्गोपम हो गया है और जब आप हमारे पास है तो फिर हमें चाहिए क्या ? हमारा तन - मन और आत्मा आपकी सुगंध से सुगंधित हो चुके है और हमारी श्वासों के प्रवाह में केवल आपकी ही अनुभूति प्रवाहित है और हमारे ह्रदय के हर एक स्पंदन में केवल आपका ही स्पंदन सुनाई देता है और सुनिए हमारी आत्मा की उस पुकार को जो बताती है की आप हमारे रोम - रोम में समायी हुयी है । हम तो सदा ही आपके थे अंगना और आप हमारी और जुदा तो हम एक - दूसरे से कभी थे ही नहीं क्योंकि जहाँ भी रहें जैसे भी रहें जिस भी संसार का हिस्सा बनें सदैव चित्रांगना बनकर ही जियें । पहचान हमारी एक - दूसरे से अलग कभी थी ही नहीं और ना ही थी जिंदगी हमारी और उसमें मिलें हुए हर एक क्षण । हमने सदैव

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    चित्रांगना

    ही एक - दूसरे को महसूस किया अपने हर एक अहसास में और अपनी प्रत्येक भावनाओं के सागर में । हमें तो कोई भी दूरी कोई भी अजनबीयत एक - दूसरे को लेकर नहीं रही बल्कि हम दोनों तो सदैव ही एक - दूसरे के अपने थे । अपने हर दर्द को अपनी प्रत्येक पीडा और वेदनाओं को हमें सौंप दीजिये । अंगना तडपती हुयी कहने लगती है - हमेशा ही जो हमारे जीवन का आधार था उसे ही हमेशा हमसे दूर कर दिया गया और एक दिन आपको भी हमसे छिन लिया जायेगा । हम वामा - बाबा और अबु के बिना तो किसी तरह जी गये पर आपको खोकर नहीं जी पायेंगे । अंगना इसी तरह व्यथित अपने डर को बयां किये जा रही थी और चित्रांगद उन्हें सम्हालनें और विश्वास भरने में लगे हुए थे की , अब कुछ भी गलत नहीं होगा उनके साथ । चित्रांगद अंगना को पीछे से अपनी बाहों में भर लेते है और पूछने लगते है - कैसी लगी आपको हमारी चित्रशाला तो अंगना आँखों को मुंधकर चित्रांगद के प्रेम में प्रेममयी होकर कहने लगती है धीमे से - बहुत ही सुन्दरतम और जीवंत है । चित्रांगद और अंगना वापस कक्ष में चलें आते है और अंगना चित्रांगद से जाने के लिये कहती है तो चित्रांगद उन्हें जाने नहीं देते और अपने बिस्तर की तरफ ले आते है और दोनों ही बैठ जाते है और अंगना जाने की जिद करती है लेकिन वो नहीं मानते और उनमें खोये हुए प्यार से कहने लगते है - आप बहुत ही सुन्दर है और आप जितनी सुन्दर बाहर से है उससे कईं अधिक अन्दर से भी है । हमने पहली बार माँ के बाद किसी ऐसी स्त्री को देखा है जिसका तन ही नहीं मन और आत्मा भी सुन्दरतमता की मिशाल है । आपकी आँखें स्वप्नों का संसार दिखाती है जो बहुत ही मनोरम और वास्तविक है और जब भी हम आपको देखते है तो सच कहते है अपने - आपको सम्हालना और अपनी कामनाओं पर संयम रखना कठिन होता चला जाता है हमारे लिये और कुछ भी स्मरण नहीं रहता आपके अतिरिक्त । एक मधुर संगीत गुंज उठता है वातावरण में आपके होने से और हर पल हर स्थान पर केवल आप ही दृशित होती है हमें और