• drrajat 12w

    माली

    मानाँ तूँ माली आज से है जो इस फ़ूल का पर कभी ये फ़ूल गुलशन था मेरे गुल्फ़ाम में
    बस चंद बातें मैं तुझे बतला दूँ उस फ़ूल की बारिश भाती नहीं उसे बाक़ी के फूलों की तरह,सर्दी हो जाती है उसे हर बरसात की सूरवात में
    जब कभी किसी रात में उससे,तूँ कहीं बाहर मिले,मैं तुझे बतला दूँ की शर्म आती है उसे यूँ भरे बाज़ार में
    जब कभी पारा गिरे या ठंड उसको यूँ लगे,तो रात भर बस हाथ उसके हाथ में यूँ थाम के,तेरे हाथों का सिर्हाना उसके माथे को तूँ दे,अरे गर्म वो होती नहीं बस यूँ ही कुछ बात से
    इक ज़रुरी बात मुझको तुझसे कहनी और है,उसकी छोटी नाक को ग़लती से भी नॉ तू छेड़ना... अरे सोने ही नहीं देता रात भर फिर उसका ऐसे छींकना
    मानाँ तूँ माली आज से है जो इस फ़ूल का पर कभी ये फ़ूल गुलशन था मेरे गुल्फ़ाम में

    ©drrajat