• abhishekdubey_ 4w

    अंधेरा

    तेरी औकात का पता लगा देंगे,बस एक चिंगारी भड़कने दे।
    सर्वव्यापिता के मद मे चुर न रह,हम अविनाशी बन दिखा देंगें।
    अजन्मा तू तूझे क्या पता,विषपान करने वाले हम,
    वसुधा के निर्माता हम,वसुधा के संहारक हम,
    अरे दंभी इस दंभ मे मत रह,तेरी घटायें कभी छटेंगी नहीं,
    तु जायेगा और जायेगा,बस तूने ज्वाला देखा ही नहीं.
    इस मिथक मे मत रहना तू,मै अनुनय विनय करूँगा!!
    क्षमा त्याग जब मुझमें है फिर सठ का साथ धरुँगा,
    काल कलंकित कर बैठी है,उसके स्वयंवर हम सब
    तवायफ है वो इह लोक की आज नही तो कल जायेगी,
    जिसका भला न कोइ हुआ आज वो मेरे साथ रहेगी,
    छटेगा तू हटेगा तू बस एक चिंगारी भड़कने दे।