• poetic_sapphire 6w

    आज ग़म की पहेली मुझको फिर से आज़माएगी,
    दिल को मिलती है जब भी कोई ख़ुशी,
    पलकों पे कुछ बूँदें ये निशानी बनके फिर छोड़ जायेगी!

    नए रास्तों से लगता है हमें डर,
    अनजान मंज़िलों की ना है हमें खबर,
    ना जाने क्यों आज एक साथी की कमी नज़र आएगी!

    दरारें जो पड़ी थी कुछ ख़्वाबों में,
    सिसकियों की नमी थी इन सिलवटों में,
    हौसलों की दीवार शायद आज काम आएगी!

    - Vivek Sukheja