• sadique_hussain 5w

    A COLLAB WITH ONE OF THE best writer on mirakee @kermech21 ��������������������������

    इश्क़-ए-माज़ाद = हद से ज्यादा प्यार
    इश्तिआल = गुस्सा
    संग-ए-रुख़-ओ-बर्क-ए-दीदा = पत्थर सा चहेरा और बिजली सी आँखें
    हरारत = गर्मजोशी
    निहादा = जरूरी गुण, हुनर

    #hindiwriters #HUnetwork #writersnetwork #hind #HWL

    Read More

    COLLAB

    आप को भुलाने का हमसे ना तगाादा कीजीए,
    ख़ुदारा, आप हमे भूल जाएं ना इरादा कीजिए,

    एक हम ही हम रहें ता-उर्मे दिल में आपके,
    बेग़ानोे की गुंज़ाइश है इसे ना कुशादा कीजीए,

    क्या बताएं उलझनें जिंदगी की वैसे भी कम नहीं है
    ख़ुदाया आप तो सनम बात जरा सादा कीजिए

    सर्द हो चले हैं वो रिश्ते महोब्बत के सारे अब
    पुरानी यादें लेकर इश्तिआल ना आमादा कीजिए

    ये रुखापन और ये संग-ए-रुख़-ओ-बर्क-ए-दीदा
    हरारत, शरारत, नजाकत-ओ-हया निहादा कीजिए

    तुम्हे आदत कहां इश्क़-ए-माज़ाद की 'सादिक़'
    बस यूँ कीजीए ना कम कीजीए ना ज़्यादा कीजीए,
    ©Kermech21 & ©Sadique