• manojkumarmanju 16w

    सच कहने की जिसमें हिम्मत नहीं...!
    वो मेरी जिन्दगी में शामिल नहीं...!!
    कर दिए हैं सौ गुनाह मांफ...!
    पर अब एक की भी गुंजाइश नहीं...!!
    जो नाचता रहा इशारों पर किसी और के...!
    उसे जीबन का कोई तजुर्बा नहीं...!!
    शौक से गुजार दो जीवन कठपुतलियों की तरह...!
    मेरी जिन्दगी में तुम्हारी कोई जरूरत नहीं...!!
    हमसफर मुझको चाहिए ऐसा कोई...!
    जिसे पत्थरों पर चलने की आदत रही...!!
    पट्टियाँ आँख पर बाँधकर चलने वाले...!
    खून के आँशू रोयेंगी एक दिन आँखें तेरी...!!
    मुबारक खुशनुमां माहौल अभी का तुझको...!
    अपनी तो दर्द सहने की आदत रही...!!
    ©manojkumarmanju