• archu92 6w

    मेरी माँ...

    तेरी ही परछाई हूँ मैं ,
    तुझसे ही तो आयी हूँ मैं ।
    तुझसा दिखना तुझसा होना ,
    क्या संभव है ऐसा होना ?

    जब भी खोलूँ अपनी आँखे ,
    तुझको ही तो पाया है ।
    मेरे डर को छू करके ,
    तूने दूर भगाया है ।

    बिन बोले तूने सबकुछ जाना ,
    मेरे हर दर्द को तूने पहचाना है ।
    हर छोटी खवाइश को मेरी ,
    तूने सच करवाया है ।

    मेरी हर बक बक को सुनकर ,
    खिल्ली कभी न उड़ाया है ।
    और नाकामी में मेरी ,
    गलती को भी बताया है ।

    जीवन के हर पथ पर मैंने ,
    तेरा साथ जो पाया है ।
    सफल रहे हर पथ पर बेटी ,
    तेरे दुआ में यही पाया है ।

    तेरी ही परछाई हूँ मैं ,
    तुझसे ही तो आयी हूँ मैं ।
    तुझसा दिखना तुझसा होना ,
    क्या संभव है ऐसा होना ।
    **अरचू**

    ©archu92