• atin_khan 5w

    *غزل*

    *لوگ ہر موڑ پہ رُک رُک کے سنبھلتے کیوں ہیں*
    *اتنا ڈرتے ہیں تو پھر گھر سے نکلتے کیوں ہیں*
    लोग हर मोड़ पे रुक रुक के संभलते क्यूँ हैं
    इतना डरते हैं तो फ़िर घर से निकलते क्यूँ हैं




    *میں نہ جگنوہوں، دیا ہوں نہ کوئی تارا ہوں*
    *روشنی والے مرے نام سے جلتے کیوں ہیں*
    मैं ना जुगनू हूँ ना दिया हूँ ना कोई तारा हूँ
    रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यूँ हैं




    *نیند سے میرا تعلق ہی نہیں برسوں سے*
    *خواب آ آ کے مری چھت پہ ٹہلتے کیوں ہیں*
    नींद से मेरा ताल्लुक़ ही नहीं बरसों से
    ख़्वाब आ आ के मेरी छत पर टहलते क्यूँ हैं




    *موڑ ہوتا ہے جوانی کا سنبھلنے کے لیئے*
    *اور سب لوگ یہیں آ کے پھسلتے کیوں ہیں*
    मोड़ होता है जवानी का संभलने के लिए
    और सब लोग यहीं आके फिसलते क्यूँ हैं




    *میکدہ ظرف کے معیار کا پیمانہ ہے*
    *خالی شیشوں کی طرح لوگ اُچھلتے کیوں ہیں​*
    मैकदा ज़र्फ़ के मेयार का पैमाना है
    खाली शीशों की तरह लोग उछलते क्यूँ हैं