• pratyushpathak 6w

    ईर्ष्या

    मन में जलन,
    तपन लिए
    दूसरो के प्रति
    विपरीत सोच के साथ
    दिया केवल कष्ट,
    अपेक्षा की,
    अनहोनी की।
    अग्रसरित किया ,
    कुपथ की ओर।
    झोंक दिया
    उत्तम विचारों को
    ज्वलंत अग्नि में ।
    सन्मार्ग की बजाय
    कुमार्ग की ओर प्रेरित किया

    ईर्ष्या द्वेष से पूरित
    हैं ये कितना कलुषित।

    ऐसे ईर्ष्यालु व्यक्ति का एक ही हश्र होता है,
    वो ईर्ष्या करते करते ,ईर्ष्या की तपन में दफन हो जाते हैं।।

    ©unionpraty