• anshumanpandey 15w

    अभी आज तन्हा रहने का मन है
    तुमसे कल मिलते हैं।
    बहोत अनबन हो गयी है मेरी खुद से
    आज खुद से कुछ कहने का मन है
    तुमसे कल मिलते हैं।
    कुँए का मेढक बन के रह गया हूँ
    मछली बन नदी में आज बहने का मन है
    तुमसे कल मिलते हैं।
    चोट जो अपनो ने दी
    आज उनको सहने का मन है
    तुमसे कल मिलते हैं।
    अब तो हर एक से चेहरा बदल मिलते हैं
    अभी आज तन्हा रहने का मन है
    तुमसे कल मिलते हैं।
    ©anshumanpandey