• aviva7 6w

    इत्तेफ़ाक है तू या हकीकत
    दिलासा है तू या सिर्फ नसीहत
    इबादत है तू या फ़कत एक दरखास्त
    क्या है तू ? इस रुह की तड़प
    या मेरी आंखों की नमी
    कि इस चेहरे पर रुकी वो खिलखिलाती हंसी?
    तू जो भी है,जैसा भी है
    तुझमें भी कहीं छुपी है वो नज़ाकत
    कैद है कहीं, तेरा इश्क, तेरी चाहत
    फिर क्यों खींची उस लकीर को तू मीटा ना सका
    उस लकीर का दायरा तू हटा ना सका..…
    इस रूह की इल्तिज़ा का तिरस्कार ना कर
    फरेब की इस आग का वार ना कर।

    ©aviva7